Saraikela: विश्व प्रसिद्ध सरायकेला शैली के छऊ नृत्य के उद्गम स्थल राज पैलेस में शुक्रवार संध्या वार्षिक चैत्र पर्व का विधिवत शुभारंभ पारंपरिक आखड़ा-माड़ा के साथ किया गया। इस अवसर पर राजमहल परिसर में आस्था, भक्ति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली, जहां कलाकारों और कला प्रेमियों का उत्साह साफ नजर आया।
राजघराना और कलाकारों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस खास मौके पर सरायकेला के राजा सह श्रीकलापीठ के संरक्षक प्रताप आदित्य सिंहदेव एवं महारानी अरुणिमा सिंहदेव सहित नगर के कई गणमान्य लोग, कलाकार और कला प्रेमी मौजूद रहे। श्रीकलापीठ के तत्वावधान में राजघराना हर वर्ष इस पारंपरिक आयोजन को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, जिससे सदियों पुरानी यह कला आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है।
11 से 13 अप्रैल तक छऊ नृत्य की भव्य प्रस्तुतियां
चैत्र पर्व के तहत 11 से 13 अप्रैल तक राजमहल परिसर में सरायकेला शैली के छऊ नृत्य की भव्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इस दौरान स्थानीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे और दर्शकों को पारंपरिक लोकनृत्य की अनूठी झलक देखने को मिलेगी।
आखड़ा-माड़ा परंपरा का विशेष महत्व
राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव ने बताया कि आखड़ा-माड़ा एक महत्वपूर्ण पारंपरिक प्रक्रिया है, जिसके बाद कलाकारों को औपचारिक रूप से नृत्य प्रस्तुत करने की अनुमति मिलती है। उन्होंने कहा कि सरायकेला छऊ नृत्य अपनी विशिष्टता, सौंदर्य और भाव-भंगिमाओं के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है और इस परंपरा से जुड़ना सभी के लिए गर्व की बात है।
मां पाउड़ी की पूजा के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान मां पाउड़ी की विशेष पूजा-अर्चना की गई और क्षेत्र की सुख-समृद्धि व कल्याण की कामना की गई। इस अवसर पर नीलांबर सिंहदेव, गुरु सुधांशु शेखर पानी, गुरु तपन कुमार भल, गुरु निर्वाण महतो, गुरु काली प्रसन्न षड़ंगी, ज्योति लाल नंद, सुखलाल मोहंती, विजय सरदार सहित कई कलाकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।