Jharkhand News: शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के मौके पर चाणक्य बीएनआर में एक कार्यक्रम रखा गया। इसमें झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि मां और बच्चे का स्वास्थ्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सरकार चाहती है कि मातृ मृत्यु दर को लगभग शून्य तक लाया जाए, यानी कोई भी महिला बच्चे को जन्म देते समय अपनी जान न गंवाए।
महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण पर सरकार का जोर
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए राज्य में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। खास तौर पर लड़कियों की पढ़ाई, 18 साल के बाद ही शादी और एनीमिया को कम करने पर ध्यान दिया जा रहा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी योजनाओं से लड़कियों को पढ़ाया और आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड की माताएं और बहनें राज्य की सबसे बड़ी ताकत हैं और सरकार उनके लिए पूरी तरह समर्पित है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बड़े अभियान और सुविधाएं
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पूरे राज्य में थैलेसीमिया, एनीमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा। यूनिसेफ के सहयोग से गांव-गांव तक जागरूकता फैलाने का काम किया जा रहा है। ममता वाहन जैसी सुविधा से गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। साथ ही सहिया दीदियों को प्रोत्साहन राशि देकर उनकी भूमिका और मजबूत की जा रही है। मंत्री ने कहा कि झारखंड अभी स्वास्थ्य सेवाओं में देश में तीसरे स्थान पर है, लेकिन लक्ष्य इसे पहले नंबर पर लाना है।
जागरूकता और बेहतर मातृ देखभाल पर खास फोकस
डिजिटल सुविधा को बढ़ावा देने के लिए 42,000 सहिया कार्यकर्ताओं को टैबलेट दिए जाएंगे, ताकि वे गांवों में बेहतर तरीके से काम कर सकें। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र भी हुआ, जिसमें डॉक्टरों ने हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान और देखभाल पर बात कही है। यूनिसेफ की पारुल शर्मा ने झारखंड के काम की तारीफ करते हुए कहा कि राज्य मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक अच्छा उदाहरण बन रहा है। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुई, जिसके जरिए मातृत्व के दौरान मानसिक शांति और स्वास्थ्य के महत्व को समझाया गया। इस मौके पर गर्भवती महिलाओं की बेहतर देखभाल से जुड़ा एक नया मॉड्यूल भी लॉन्च किया गया।