KU PhD Admission: कोल्हान विश्वविद्यालय द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए जारी पीएचडी चयन सूची ने विश्वविद्यालय की साख पर चिंताजनक तस्वीर पेश की है. विभिन्न विभागों में उपलब्ध कुल 339 सीटों के विरुद्ध मात्र 89 अभ्यर्थियों का ही अंतिम रूप से चयन हो पाया है, जिसका अर्थ है कि लगभग 75 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं. कॉमर्स जैसे लोकप्रिय विषय में 47 में से केवल 10, जबकि दर्शनशास्त्र की 52 सीटों में से मात्र 3 अभ्यर्थी ही चयनित हो सके. सबसे चौंकाने वाली स्थिति एंथ्रोपोलॉजी, बॉटनी, केमिस्ट्री और जियोलॉजी जैसे विषयों की रही, जहां चयन का आंकड़ा शून्य रहा.
लेटलतीफी और उदासीनता बनी बड़ी बाधा
शोधार्थियों के बीच केयू से दूरी बनाने का मुख्य कारण विश्वविद्यालय की नामांकन प्रक्रिया में होने वाली देरी और सत्रों का समय पर न चलना माना जा रहा है. छात्रों का कहना है कि बार-बार आने वाली तकनीकी अड़चनों और लेटलतीफी के कारण उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटका रहता है. हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन इन दावों के उलट अपनी पीठ थपथपा रहा है. विवि प्रवक्ता डॉ. मीनाक्षी मुंडा का कहना है कि कुलपति के मार्गदर्शन में पहली बार रिकॉर्ड 9 महीने के भीतर परिणाम जारी कर प्रशासनिक गंभीरता का परिचय दिया गया है, ताकि शोध कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे हो सकें.
17 विषयों के साक्षात्कार के बाद भी नहीं भरीं सीटें
विश्वविद्यालय ने 17 विषयों के लिए कुल 145 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया था, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे. हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान और भूगोल जैसे मुख्य विषयों में भी सीटें खाली रह गईं. भौतिकी (फिजिक्स) में 8 सीटों पर केवल 1 और गणित में 6 सीटों पर महज 1 छात्र का चयन होना शोध के प्रति गंभीर संकट को दर्शाता है. विश्वविद्यालय प्रबंधन का दावा है कि पिछले सत्र का कोर्स वर्क भी समय पर पूरा कर लिया गया है, लेकिन सीटों का भारी संख्या में खाली रहना कोल्हान विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है.