Jharkhand News: झारखंड के डे-बोर्डिंग सेंटरों में प्रशिक्षण ले रहे हजारों खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर लगा है. राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों को पौष्टिक आहार के लिए प्रतिमाह दी जाने वाली महज 500 रूपए की प्रोत्साहन राशि पिछले एक साल से नहीं मिली है. महंगाई के इस दौर में जहां 500 रूपए में महीने भर का पौष्टिक आहार मिलना नामुमकिन है, वहीं इस मामूली रकम का भुगतान न होना विभाग की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2005-06 से चल रहे इन सेंटरों के 20 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब भुगतान में इतनी लंबी देरी हुई है.
बजट में भारी कटौती और तकनीकी पेंच बना बाधा
खेल विभाग का वार्षिक बजट लगभग 145 करोड़ रूपए होने के बावजूद खिलाड़ियों को देने के लिए फंड की कमी बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, सेंटरों के संचालन के लिए सालाना 42 से 45 करोड़ रूपए की आवश्यकता होती है, लेकिन बीते वित्तीय वर्ष में प्रोत्साहन राशि के मद में केवल 15 करोड़ रूपए ही आवंटित किए गए. अपर्याप्त बजट और तकनीकी कारणों से हजारों उदीयमान खिलाड़ियों की डाइट और उनके अभ्यास पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों के मनोबल में भारी गिरावट देखी जा रही है.
नकद पुरस्कारों से भी दूर रहे पदक विजेता खिलाड़ी
खिलाड़ियों की परेशानी सिर्फ प्रोत्साहन राशि तक सीमित नहीं है; वे अपने हक के “कैश प्राइज” के लिए भी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए वितरित पुरस्कारों में कई पात्र खिलाड़ियों के नाम सूची से गायब मिले. हालांकि, शिकायत के बाद खेल निदेशालय ने दोबारा आवेदन तो आमंत्रित किए, लेकिन पुरस्कार की राशि अब तक खिलाड़ियों के बैंक खातों में नहीं पहुंची है. सरकार एक ओर खेलों को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाओं और समय पर भुगतान के अभाव में राज्य की खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं.