Jharkhand Big News: झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पास कराने के नाम पर सॉल्वर गैंग ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 लाख रुपये का सौदा किया था. रांची पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने 159 अभ्यर्थियों से एडवांस के तौर पर 3-3 लाख रुपये वसूल लिए थे, यानी परीक्षा से पहले ही करीब 4.77 करोड़ रुपये की उगाही की जा चुकी थी. बाकी के 7 लाख रुपये परीक्षा पास होने के बाद देने तय हुए थे. पुलिस ने इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए मास्टरमाइंड अतुल वत्स और 159 अभ्यर्थियों समेत कुल 166 आरोपियों को जेल भेज दिया है.
नर्सिंग कॉलेज के ठेकेदार की भी थी मिलीभगत
जांच में यह बात सामने आई है कि तमाड़ के रणगांव स्थित जिस अर्द्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज में छापेमारी हुई, वहां अभ्यर्थियों के ठहरने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था कॉलेज के ठेकेदार और मालिक की मिलीभगत से की गई थी. इस काम के लिए गिरोह और ठेकेदार के बीच एक महीने पहले ही मोटी रकम का सौदा हुआ था. गैंग ने अभ्यर्थियों को वहां तक पहुंचाने के लिए निजी वाहनों का इंतजाम भी किया था. पुलिस को मौके से डिजिटल साक्ष्य और प्रश्न-पत्र के उत्तर रटवाने के प्रमाण मिले हैं, हालांकि जेएसएससी ने दावा किया है कि प्रश्न-पत्रों का मिलान केवल आंशिक रूप से हुआ है.
अंतर्राज्यीय नेटवर्क और गिरफ्तारियों का ब्योरा
गिरफ्तार किए गए 166 आरोपियों में 152 पुरुष और 7 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं, जबकि गिरोह के 7 मुख्य सदस्य सलाखों के पीछे पहुंचाए गए हैं. गिरोह के सदस्यों में बिहार के अपराधियों के साथ-साथ झारखंड के रामगढ़ और रांची के स्थानीय गुर्गे भी शामिल हैं, जो अभ्यर्थियों की सेटिंग और उगाही का काम देख रहे थे. पुलिस ने अब तक कुल 179 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है. फिलहाल, विशेष पुलिस टीम गिरोह के उन अन्य गुर्गों और रसूखदारों की तलाश में छापेमारी कर रही है, जिन्होंने इस पेपर लीक सिंडिकेट को पर्दे के पीछे से समर्थन दिया.