Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-04-14

Ambedkar Jayanti: भेदभाव से लड़कर संविधान तक पहुंचे बाबासाहेब, जानिए क्यों आज भी जरूरी हैं उनके विचार

Ambedkar Jayanti: हर साल 14 अप्रैल को देशभर में अंबेडकर जयंती मनाई जाती है. यह दिन भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद करने का दिन है. लेकिन यह सिर्फ श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों को समझने और अपनाने का भी समय है. आज के दौर में जब समानता और अधिकारों की बात होती है, तब बाबासाहेब की सोच और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाती है.
बाबासाहेब ने कैसे महू से लंदन तक के सफर किया तय
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था. वह भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार थे और स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री भी बने. उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की. इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद उनका जीवन आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें बचपन से ही जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा.

 संघर्ष की कहानी, जिसने उन्हें बनाया असाधारण नेता
बाबासाहेब का बचपन सामाजिक भेदभाव और अपमान से भरा था. स्कूल में उन्हें अलग बैठाया जाता था और पानी तक छूने की अनुमति नहीं थी. इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया और समाज में फैले अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई. यही संघर्ष उन्हें करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बना देता है.

संविधान निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका रही बाबसाहेब की 
डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में काम किया. उन्होंने संविधान में समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांतों को मजबूत आधार दिया.
उनके प्रयासों की वजह से ही आज हर नागरिक को मौलिक अधिकार मिले हैं. उन्होंने कानून के जरिए समाज में बराबरी लाने की कोशिश की.

 समाज सुधार और अधिकारों की लड़ाई
डॉ. अंबेडकर ने सिर्फ संविधान ही नहीं बनाया, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए भी लगातार संघर्ष किया. उन्होंने दलितों, महिलाओं और मजदूरों के अधिकारों की बात की. वह मानते थे कि जब तक समाज में बराबरी नहीं आएगी, तब तक देश का विकास अधूरा रहेगा.

 “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो...”
डॉ. अंबेडकर का सबसे प्रसिद्ध संदेश था. “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो.” उनका मानना था कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे व्यक्ति अपने अधिकारों को समझ सकता है और अन्याय के खिलाफ खड़ा हो सकता है. आज के समय में भी यह संदेश युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.


अंबेडकर जयंती सिर्फ एक औपचारिक दिन नहीं है. यह हमें याद दिलाती है कि समानता, शिक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष आज भी जारी है. अगर हम वास्तव में बाबासाहेब को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो उनके बताए रास्ते पर चलना होगा और एक ऐसा समाज बनाना होगा जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !