Deoghar News: बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में हाल ही में पाकिस्तानी मुद्रा मिलने और खुफिया विभाग की संवेदनशील रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है. आगामी सावन मेले में लाखों की भीड़ को देखते हुए मंदिर के चारों मुख्य द्वारों पर स्थायी मेटल डिटेक्टर और जांच उपकरण लगाने की योजना है. वर्तमान में सुरक्षा बल अस्थायी तौर पर हर आने-जाने वाले के बैग और सामान की सघन तलाशी ले रहे हैं. एसडीएम के नेतृत्व में चले विशेष अभियान के तहत मंदिर प्रांगण से उन सभी अवैध और अनिबंधित दुकानों को हटा दिया गया है, जो सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए खतरा बनी हुई थीं.
एक-एक सेवादार का बनेगा डिजिटल डेटाबेस
मंदिर प्रशासन अब परिसर के भीतर सक्रिय हर व्यक्ति पर पैनी नजर रखने के लिए एक मास्टर डेटाबेस तैयार कर रहा है. इसमें मंदिर के स्थायी कर्मियों के अलावा फोटोग्राफर, गुमास्ता, फूल-बेलपत्र बेचने वाले और पुरोहितों के सहयोगियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है. अब तक लगभग 200 लोगों ने अपने आधार कार्ड और प्रामाणिक दस्तावेज जमा कर दिए हैं. पुलिस और मंदिर प्रशासन संयुक्त रूप से इस डेटा को सिस्टम में सुरक्षित रखेंगे, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल पहचान और पूछताछ की जा सके. सभी वैध कर्मियों को विशेष परिचय पत्र (ID Card) जारी किए जा रहे हैं.
100 साल पुरानी दुकानों को प्राथमिकता, नई पर कार्रवाई
दशकों से मंदिर प्रांगण में पूजन सामग्री बेचकर अपनी जीविका चलाने वाले स्थानीय दुकानदारों के लिए भी नए नियम लागू किए गए हैं. प्रबंधन ने ऐसी 77 दुकानों को चिह्नित किया है जो एक सदी से भी अधिक समय से वहां संचालित हैं. इनमें से 38 दुकानों को नंबर आवंटित कर दुकान लगाने की अनुमति दे दी गई है, जबकि शेष 32 की पात्रता की जांच जारी है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पुरानी और पंजीकृत दुकानों को व्यवस्थित किया जाएगा, लेकिन अतिक्रमण कर बनाई गई नई और अवैध दुकानों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण पर फोकस
एसडीओ सह बाबा मंदिर प्रभारी रवि कुमार ने सख्त निर्देश दिए हैं कि मंदिर प्रांगण को पूरी तरह से खुला और अतिक्रमण मुक्त रखा जाए. इसका उद्देश्य यह है कि सावन के दौरान आने वाले कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को कतारबद्ध होने और जलार्पण करने में कोई भौतिक बाधा न आए. फोटोग्राफर्स और स्टूडियो मालिकों के लिए भी कड़े निर्देश हैं कि वे केवल अधिकृत पहचान पत्र के साथ ही कार्य करें. प्रशासन की इस रणनीति का मुख्य लक्ष्य मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए श्रद्धालुओं को एक निर्भय और सुलभ दर्शन का अनुभव प्रदान करना है.