Adityapur News: आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 17 में स्थित मगध सम्राट और सिद्धेश हॉस्पिटल के समीप स्वच्छता के मानकों की धज्जियां उड़ रही हैं. अस्पताल के ठीक बाहर जमा गंदा पानी और कचरे का ढेर “बायो-हजार्ड” की स्थिति पैदा कर रहा है. यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों पर अब संक्रमण का दोहरा खतरा मंडरा रहा है. गंदगी के कारण इलाके में मच्छरों और बैक्टीरिया का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका जताई जा रही है.
स्कूल की लापरवाही ने बढ़ाई मुसीबत
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सेंट्रल पब्लिक स्कूल द्वारा नियमों के विरुद्ध नालियों का दूषित पानी खुले भूखंड में छोड़ा जा रहा है. यह गंदा पानी सीधे अस्पतालों के सामने जमा हो रहा है, जिससे पूरा इलाका बदबू की चपेट में है. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से स्कूल प्रबंधन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. एक शिक्षण संस्थान द्वारा की जा रही यह लापरवाही आसपास के मरीजों और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है.
नगर निगम की आपराधिक चुप्पी
वार्ड पार्षद और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है कि नगर निगम की गाड़ियां हफ्तों से कचरा उठाने नहीं आई हैं और नालियां पूरी तरह जाम पड़ी हैं. स्वच्छ भारत मिशन की रैंकिंग में पिछड़ने के बावजूद आदित्यपुर नगर निगम अपनी कार्यशैली सुधारने को तैयार नहीं है. स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई. अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी गंदगी प्रशासनिक विफलता का बड़ा प्रमाण है.
आपराधिक लापरवाही पर कार्रवाई की मांग
अस्पताल के बाहर कचरा प्रबंधन न होना और जलजमाव की समस्या को स्थानीय लोगों ने आपराधिक लापरवाही करार दिया है. उनका कहना है कि जो मरीज यहां ठीक होने आते हैं, वे इस गंदगी के कारण और अधिक बीमार पड़ सकते हैं. निवासियों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मांग की है कि सेंट्रल पब्लिक स्कूल पर जुर्माना लगाया जाए और तत्काल प्रभाव से कचरे की सफाई व जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.