National News: लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह विधेयक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नहीं, बल्कि "परिसीमन" के जरिए सत्ता पर पकड़ मजबूत करने का एक गुप्त एजेंडा था. प्रियंका ने सवाल किया कि जब 2023 में महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पारित हो चुका था, तो सरकार उसे लागू करने के बजाय चुनावी मौसम में यह नया और जटिल मसौदा क्यों लाई?
"महिलाएं मसीहा और साजिश के बीच का अंतर जानती हैं"
बीजेपी द्वारा विपक्ष को "महिला विरोधी" करार दिए जाने पर प्रियंका ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि "मसीहा" बनना इतना आसान नहीं है. उन्होंने मणिपुर की हिंसा, उन्नाव कांड और महिला पहलवानों के अपमान का जिक्र करते हुए पूछा कि उस वक्त सरकार के मसीहा कहां थे? उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी महिलाओं की भावनाओं का इस्तेमाल केवल सत्ता बचाने के लिए करना चाहती है, लेकिन देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और वे सरकार के इस राजनीतिक दिखावे को समझ चुकी हैं.
बिना शर्त आरक्षण देने की चुनौती
प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर मंशा साफ है, तो 2023 वाले पुराने बिल को ही लागू किया जाए. उन्होंने मांग की कि 2029 के चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए सरकार पुराने बिल में जरूरी संशोधन पेश करे, जिसका कांग्रेस और पूरा विपक्ष समर्थन करेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण के लिए परिसीमन की कोई अनिवार्य आवश्यकता नहीं है और सरकार केवल सीटों का भूगोल बदलकर राजनीतिक लाभ लेने की फिराक में थी, जिसे विपक्षी एकजुटता ने नाकाम कर दिया है.
संविधान की जीत और आगामी रणनीति
कांग्रेस महासचिव ने इस घटनाक्रम को विपक्षी एकता और संविधान की बड़ी जीत करार दिया. उन्होंने कहा कि जनता महंगाई और बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों से परेशान है, जिससे ध्यान भटकाने के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में ऐसे आधे-अधूरे बिल ला रही है. प्रियंका ने दोहराया कि कांग्रेस महिलाओं की वास्तविक भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है और आगामी चुनावों में जनता सरकार की इन साजिशों का करारा जवाब देगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि हक की बात होनी चाहिए, राजनीति की नहीं.