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  • 2026-04-19

BREAKING: एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक पास आदित्य आनंद गिरफ्तार, श्रमिक आंदोलन की आड़ में हिंसा फैलाने का था मास्टरमाइंड

BREAKING: औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक आंदोलन की आड़ लेकर हिंसा भड़काने के आरोप में वांछित इंजीनियर आदित्य आनंद उर्फ ‘रस्टी’ को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। यूपी एसटीएफ और नोएडा पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार देर रात करीब 2 बजे तमिलनाडु के तिरुचापल्ली रेलवे स्टेशन पर दबिश देकर उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने अपना हुलिया बदलने की कोशिश की थी और पहचान छिपाने के उद्देश्य से अपने बाल भी कटवा लिए थे। बताया जा रहा है कि वह चेन्नई में छिपकर रह रहा था और वहां से केरल भागने की फिराक में था, जहां से समुद्र के रास्ते विदेश फरार होने की उसकी योजना थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते उसकी इस साजिश को नाकाम कर दिया।

एक लाख का इनामी, लंबे समय से था फरार
पुलिस के अनुसार आदित्य आनंद पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था। लंबे समय से फरार चल रहे इस आरोपी की तलाश कई राज्यों में की जा रही थी। उसकी गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां लगातार उसके मूवमेंट पर नजर बनाए हुए थीं और आखिरकार सटीक सूचना के आधार पर उसे दबोच लिया गया।

एनआईटी जमशेदपुर से पढ़ाई, कट्टर विचारधारा से जुड़ाव
बिहार के हाजीपुर का रहने वाला आदित्य आनंद पढ़ाई में इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि का है और उसने एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक की डिग्री हासिल की है। जानकारी के मुताबिक, जून 2025 में नोएडा आने के बाद वह धीरे-धीरे कुछ कट्टरपंथी संगठनों के संपर्क में आया और मजदूर बिगुल, दिशा स्टूडेंट संगठन तथा भारतीय क्रांतिकारी मजदूर पार्टी जैसे समूहों के साथ मिलकर अपना नेटवर्क तैयार किया। इसी नेटवर्क के जरिए उसने श्रमिकों के बीच प्रभाव बढ़ाने और उन्हें संगठित करने की कोशिश की।

हिंसा की साजिश और डिजिटल नेटवर्क का इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि आदित्य ने मुख्य आरोपी रूपेश राय के साथ मिलकर 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच हिंसा की साजिश रची थी। 11 अप्रैल को रूपेश और मनीषा की गिरफ्तारी के बाद वह लगातार ठिकाने बदलते हुए नोएडा से दिल्ली और फिर चेन्नई भाग गया था। पुलिस को यह भी पता चला है कि उसने श्रमिकों को उकसाने और अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ा गया, ताकि पुलिस की निगरानी से बचा जा सके और गुप्त रूप से गतिविधियों को संचालित किया जा सके।

अब फंडिंग और नेटवर्क की गहराई से जांच
गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस आदित्य और उसके सहयोगियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसियों की प्राथमिकता उसके मोबाइल डेटा, चैट, संपर्क सूत्रों और पूरे नेटवर्क की पड़ताल करना है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उसे देश-विदेश से किस तरह की फंडिंग मिल रही थी। पुलिस उन लोगों की भी पहचान करने में जुटी है जिन्होंने उसे तमिलनाडु में शरण दी और विदेश भागने में संभावित मदद करने की कोशिश की। पूरे मामले को लेकर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
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