National News: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को पत्र जारी कर राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के सम्मान और उसके उचित उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश दिए हैं. आयोग का मानना है कि शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन से विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और एकता की भावना सशक्त होगी. यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि संस्थानों में होने वाले औपचारिक आयोजनों में राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति को प्राथमिकता दी जाए, ताकि युवा पीढ़ी में देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव और गहरा हो सके.
सामूहिक गायन और गरिमा बनाए रखने के सख्त निर्देश
नए निर्देशों के अनुसार, सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को “वंदे मातरम” का प्रदर्शन पूरी गरिमा और निर्धारित मानकों के अनुरूप करना अनिवार्य होगा. ध्वज फहराने के कार्यक्रमों, सांस्कृतिक उत्सवों और अन्य औपचारिक सभाओं में सामूहिक गायन की अनुमति दी गई है. आयोग ने सलाह दी है कि गीत की प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए संस्थान पर्याप्त ध्वनि व्यवस्था और प्रशिक्षित गायन समूह (क्वायर) तैयार रखें. इससे सभी प्रतिभागी एक स्वर और लय में गीत प्रस्तुत कर सकेंगे, जिससे गरिमा और अनुशासन बना रहेगा.
निर्धारित मानकों और आधिकारिक संस्करण का ही होगा उपयोग
यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रमों में, विशेषकर राष्ट्रपति के आगमन या प्रस्थान के अवसर पर (औपचारिक राज्य समारोहों को छोड़कर), “वंदे मातरम” का गायन किया जा सकता है. संस्थानों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी आयोजन में केवल “वंदे मातरम” के आधिकारिक संस्करण का ही उपयोग किया जाए. किसी भी स्थिति में राष्ट्रीय गीत की गरिमा से समझौता नहीं होना चाहिए और इसके गायन के समय निर्धारित शिष्टाचार का पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा.
शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय चेतना पर जोर
इस पहल का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के वातावरण को राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ना है. विशेषज्ञों के अनुसार, यूजीसी का यह कदम कैंपस के भीतर एक अनुशासित और राष्ट्रप्रेमी माहौल तैयार करने में सहायक सिद्ध होगा. आयोग ने सभी कुलपतियों और प्राचार्यों को इन निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है. आने वाले सत्र से सभी प्रमुख आयोजनों की शुरुआत या समापन में राष्ट्रीय गीत की भूमिका और स्पष्ट रूप से दिखाई देगी, जिससे छात्रों में देश की ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान बढ़ेगा.