Jharkhand News: बोकारो, हजारीबाग और रांची कोषागार में गड़बड़ी के मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सभी 33 ट्रेजरी की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं. गिरिडीह में इस सख्ती का सीधा असर करीब 8 हजार सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर पड़ा है. आमतौर पर महीने की 5 तारीख तक मिलने वाला वेतन 18 अप्रैल बीत जाने के बाद भी जारी नहीं हो सका है. प्रशासन अब हर फाइल की गहन मॉनिटरिंग कर रहा है और बिना पूर्ण सत्यापन के किसी भी विभाग की निकासी पर रोक लगा दी गई है.
उपायुक्त की सीधी निगरानी, पुलिस और शिक्षा विभाग पर विशेष नजर
गिरिडीह के उपायुक्त रामनिवास यादव खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं. हालांकि जिले में अब तक किसी बड़े घोटाले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियातन शिक्षा और पुलिस विभाग जैसे बड़े महकमों की फाइलों को बारीकी से जांचा जा रहा है. वर्तमान में स्थिति यह है कि केवल उन्हीं कर्मचारियों का वेतन जारी हुआ है, जिनका सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है. शेष हजारों कर्मियों को अपनी सेवा विवरणों की जांच पूरी होने तक इंतजार करना होगा.
190 DDO स्तर पर दस्तावेजों की स्क्रूटनी शुरू
जिले में कुल 190 आहरण एवं संवितरण पदाधिकारी (DDO) कोड पंजीकृत हैं, जिन्हें अपने-अपने विभागों के वित्तीय लेन-देन की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वर्तमान संकट को देखते हुए सभी डीडीओ अपने स्तर पर कर्मचारियों के दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रहे हैं. नियम कड़ा कर दिया गया है कि जब तक डीडीओ हर कर्मचारी के रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन नहीं कर लेते, तब तक वेतन के लिए डिजिटल सिग्नेचर नहीं किए जाएंगे.
नया नियम: शपथ पत्र और सेवा विवरणी देना अनिवार्य
अब जिले के सभी सरकारी कर्मियों (पुलिस, शिक्षा, समाहरणालय आदि) को वेतन पाने के लिए एक निर्धारित प्रपत्र भरना अनिवार्य होगा. इसमें योगदान (Joining) से लेकर अब तक की पूरी सेवा विवरणी देनी होगी, जिसे शपथ पत्र (Affidavit) के साथ संबंधित डीडीओ के पास जमा करना होगा. सूत्रों का कहना है कि सिस्टम सुधार और पोर्टल में तकनीकी बदलावों के कारण भी कुछ देरी हो रही है, लेकिन प्रशासन का मुख्य जोर किसी भी संभावित अवैध निकासी को रोकना है.