National News: TCS जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण और उत्पीड़न मामले की मुख्य आरोपी निदा एजाज खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. सोमवार को नासिक सत्र न्यायालय (Nashik Session Court) में अग्रिम जमानत याचिका पर हुई लंबी बहस के बाद अदालत ने निदा खान को कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने फिलहाल सुरक्षा देने की दलील को स्वीकार नहीं किया.
बचाव पक्ष ने दी गर्भावस्था और मेडिकल ग्राउंड की दलील
सुनवाई के दौरान आरोपी निदा खान के वकील राहुल कासलीवाल ने अदालत के समक्ष मुख्य रूप से मानवीय आधार पर राहत मांगी. बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि निदा खान गर्भवती हैं और उन्हें इस स्थिति में उचित चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है. इसके साथ ही, बचाव पक्ष ने मामले में लगाई गई एट्रोसिटी एक्ट (SC/ST Act) की धाराओं को भी चुनौती देते हुए कहा कि इन्हें केवल मामले को गंभीर बनाने के लिए जोड़ा गया है. हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इन दलीलों का कड़ा विरोध करते हुए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई.
हाई-प्रोफाइल मामले में साक्ष्यों की सुरक्षा पर जोर
सरकारी वकील और शिकायतकर्ता की कानूनी टीम ने जमानत का विरोध करते हुए इसे एक बेहद गंभीर प्रकृति का अपराध बताया. अभियोजन पक्ष का तर्क है कि एक नामी आईटी कंपनी के भीतर महिलाओं का शोषण पेशेवर मर्यादा और सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. सरकारी पक्ष ने कोर्ट को बताया कि यदि आरोपी को इस समय राहत मिलती है, तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है. कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है.
धर्मांतरण और उत्पीड़न के आरोपों से सनसनी
यह मामला केवल कार्यस्थल पर उत्पीड़न तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धर्मांतरण के गंभीर आरोप भी जुड़े हैं, जिसने इसे राज्यव्यापी चर्चा का विषय बना दिया है. बचाव पक्ष का कहना है कि वे अगली सुनवाई में सभी मेडिकल और कानूनी तथ्यों को फिर से मजबूती से रखेंगे. फिलहाल, निदा खान पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है और पुलिस इस हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट के अन्य पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है.