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  • 2026-04-22

Jharkhand News: बंगाल अनुभव के बाद अलर्ट मोड में सीएम हेमंत, कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर नाम जांचने का निर्देश

Jharkhand News: पश्चिम बंगाल के चुनावी रण से लौटते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड में मोर्चा संभाल लिया है. बंगाल में जिस तरह बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटने की खबरें आईं, उसने झामुमो (JMM) नेतृत्व की नींद उड़ा दी है. मुख्यमंत्री को डर है कि अगर झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के दौरान यही खेल हुआ, तो उनका कोर वोट बैंक पूरी तरह बिखर सकता है. इसी खतरे को देखते हुए हेमंत सोरेन ने पूरी पार्टी को हाई अलर्ट पर डाल दिया है और जिला कमेटियों को निर्देश दिया है कि वे बूथ स्तर पर जाकर एक-एक नाम की जांच करें.

सिर्फ वोट नहीं, सरकारी योजनाओं के हक पर भी है खतरा
झामुमो की इस चिंता के पीछे एक बड़ा गणित छिपा है. दरअसल, मंइयां सम्मान योजना, पेंशन और राशन जैसी झारखंड सरकार की तमाम बड़ी योजनाएं पहचान पत्र और आधार से जुड़ी हैं. पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि अगर किसी गरीब का नाम वोटर लिस्ट से कटता है, तो उसका पहचान संकट खड़ा हो जाएगा. इसका सीधा मतलब है कि वह सरकारी योजनाओं के लाभ से भी हाथ धो बैठेगा. मुख्यमंत्री ने इसे साफ तौर पर सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कार्यकर्ताओं को चेताया है कि यह केवल चुनावी हार-जीत का नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकार का मामला है.

हेमंत सोरेन ने अब सरकार की योजनाओं को केवल अधिकारियों के भरोसे छोड़ने के बजाय संगठन को भी जमीन पर उतार दिया है. पार्टी के जिला अध्यक्षों और प्रखंड प्रभारियों को आदेश दिया गया है कि वे पंचायत स्तर पर टीमों का गठन करें. ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि लाभार्थियों का नाम वोटर लिस्ट में सुरक्षित रहे. अब तक जो योजनाएं केवल फाइलों में प्रशासनिक स्तर पर चल रही थीं, अब उन्हें सीधे राजनीतिक संगठन से जोड़ दिया गया है, ताकि हर बूथ पर झामुमो की पकड़ मजबूत बनी रहे.

चुनावी जंग से पहले संगठन की फायर-फाइटिंग रणनीति
विपक्ष की घेराबंदी और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए हेमंत सोरेन कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं. झामुमो महासचिव विनोद पांडेय के अनुसार, संगठन अब सरकार की योजनाओं और मतदाता सूची की शुद्धता को एक साथ लेकर चलेगा. यह नई रणनीति संकेत दे रही है कि हेमंत सोरेन ने आने वाले चुनावों के लिए अभी से किलेबंदी शुरू कर दी है. प्रशासन और संगठन के बीच का यह नया तालमेल न केवल वोट बैंक को सुरक्षित रखेगा, बल्कि विरोधियों को भी यह संदेश देगा कि झामुमो अब हर मोर्चे पर लड़ने के लिए तैयार है.
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