Jharkhand News: झारखंड की वित्तीय हालत को पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अब चाबुक चला दिया है. राज्य सरकार ने साफ़ कर दिया है कि जनहित की योजनाओं के लिए पैसा हवा से नहीं आएगा, इसलिए वित्त विभाग ने 8 बड़े महकमों को 64,300 करोड़ रुपये का पहाड़ जैसा लक्ष्य थमा दिया है. अपर मुख्य सचिवों को भेजे गए कड़े फरमान में कहा गया है कि अब बहानेबाजी नहीं चलेगी. वित्त विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि विधानसभा से पास हुए बजट के हिसाब से तिजोरी भरनी ही होगी, वरना लापरवाह अफसरों पर गाज गिरना तय है.
खनन और टैक्स विभाग पर गिरा बिजली जैसा बोझ
सरकार की इस मेगा प्लानिंग में सबसे ज्यादा पसीने खान एवं भूतत्व विभाग और वाणिज्य कर विभाग के छूटने वाले हैं. खनन विभाग को अकेले 27,000 करोड़ रुपये का टारगेट दिया गया है, जो राज्य के राजस्व का सबसे बड़ा हिस्सा है. वहीं, कमर्शियल टैक्स विभाग के जिम्मे 24,000 करोड़ रुपये की वसूली डाली गई है. इन दोनों विभागों को सख्त निर्देश हैं कि टैक्स चोरी और अवैध माइनिंग पर नकेल कसकर हर हाल में खजाना भरें. अगर ये दो विभाग फेल हुए, तो राज्य की पूरी इकोनॉमी डगमगा सकती है.
शराब, जमीन और पानी, हर मोर्चे पर सरकार सख्त
सिर्फ माइनिंग ही नहीं, सरकार ने हर उस रास्ते पर पहरा बिठा दिया है जहां से राजस्व आता है. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग को 4,500 करोड़ और परिवहन विभाग को 2,700 करोड़ रुपये जुटाने का टास्क मिला है. वहीं भू-राजस्व विभाग को 2,000 करोड़ और निबंधन प्रभाग को 1,800 करोड़ रुपये वसूलने होंगे. यहाँ तक कि वन विभाग को 1,300 करोड़ और जल संसाधन विभाग को भी 1,000 करोड़ रुपये का टारगेट पूरा करना होगा. यानी अब सरकार पानी से लेकर जंगल तक, हर संसाधन से अपनी पाई-पाई वसूलने के मूड में है.
मंइयां सम्मान और पेंशन योजनाओं के लिए मिशन रेवेन्यू
जानकारों का मानना है कि मंइयां सम्मान और सर्वजन पेंशन जैसी बड़ी योजनाओं को बिना रुके चलाने के लिए हेमंत सरकार को भारी फंड की जरूरत है. यही वजह है कि सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती. इस बार केवल लक्ष्य नहीं दिए गए हैं, बल्कि वसूली की डेली मॉनिटरिंग के लिए एक हाई-लेवल टीम भी तैनात की गई है. अब देखना यह है कि सरकारी बाबुओं की पुरानी सुस्ती इस नए टारगेट के आगे टिक पाती है या मुख्यमंत्री का यह मास्टरस्ट्रोक काम कर जाता है.