Adityapur News: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम (वार्ड नंबर-20) में प्रशासन की लापरवाही का एक गंभीर चेहरा सामने आया है. थाना रोड के पास करोड़ों की लागत और बड़े दावों के साथ बनाया गया सार्वजनिक सुलभ शौचालय आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. लंबे समय से क्षतिग्रस्त और जर्जर हो चुका यह शौचालय आम जनता, विशेषकर महिलाओं के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है. अस्पताल और बाजार के पास स्थित इस बुनियादी सुविधा का बंद होना नगर निगम के स्वच्छता के दावों की पोल खोल रहा है.
इस इलाके की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शौचालय के ठीक सामने सरकारी अस्पताल और महिला प्रसव केंद्र है. यहां 24 घंटे मरीजों और उनके परिजनों का आना-जाना लगा रहता है. पास में ही साप्ताहिक बाजार, थाना और रेलवे स्टेशन जाने वाली मुख्य सड़क है, जहां से रोज हजारों लोग गुजरते हैं. ऐसे व्यस्ततम क्षेत्र में शौचालय का काम न करना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है.
कागजों में उलझी मरम्मत, 27 अप्रैल को फिर चेतावनी
स्थानीय नागरिकों और नेशनल एंटी करप्शन कमेटी ऑफ इंडिया के कोल्हान प्रभारी बाबू तांती के अनुसार, निगम को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति तो हुई, लेकिन काम आज भी अधूरा है. थक-हारकर अब स्थानीय लोग सोमवार, 27 अप्रैल को एक बार फिर नगर निगम के अपर आयुक्त और महापौर को ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं. यह ज्ञापन केवल एक पत्र नहीं, बल्कि प्रशासन को उसकी सोई हुई जिम्मेदारी याद दिलाने की एक कोशिश है.
संवेदनशीलता की दरकार
एक तरफ हम ओडीएफ और स्वच्छ भारत का जश्न मनाते हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल और प्रसव केंद्र के बाहर महिलाओं को एक अदद सुरक्षित शौचालय के लिए भटकना पड़ता है. यह केवल ईंट-पत्थर की मरम्मत का मामला नहीं है, बल्कि उन हजारों महिलाओं के गरिमापूर्ण जीवन से जुड़ा सवाल है जो मजबूरी में इस जर्जर व्यवस्था का दंश झेल रही हैं. नगर निगम को चाहिए कि वह फाइलों से बाहर निकलकर धरातल पर उतरे और इस समस्या का स्थायी समाधान करे.