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  • 2026-04-25

Jamshedpur Big News: औद्योगिक क्रांति की नई छलांग, टाटा स्टील की 1500 करोड़ की कांबी मिल का मई में होगा शुभारंभ

Jamshedpur Big News: इस्पात नगरी जमशेदपुर के औद्योगिक मानचित्र पर एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. टाटा स्टील द्वारा लगभग 1,500 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार की गई अत्याधुनिक कांबी मिल (Combi Mill) का उद्घाटन मई माह में प्रस्तावित है. टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदरा रामम ने पुष्टि की है कि इस महत्वाकांक्षी इकाई के लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से समय मांगा गया है. संभावना है कि मई के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री इस इकाई को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी.

तकनीकी विशिष्टता: एक छत के नीचे दोहरे उत्पाद
इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट लिमिटेड (ISWP) परिसर में स्थापित यह मिल इंजीनियरिंग का एक आधुनिक चमत्कार है. इसे कांबी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें एक ही यूनिट के भीतर वायर रॉड्स और मर्चेंट बार्स (सरिया) दोनों के उत्पादन की क्षमता है. 0.5 मिलियन टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता वाली यह मिल वर्तमान में रैंप-अप (उत्पादन की तैयारी) के दौर में है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और लचीलापन है, जहां 100 मीटर प्रति सेकंड की रफ़्तार से वायर रॉड्स का निर्माण किया जा सकता है.

बुनियादी ढांचे को मिलेगी टाटा की मजबूती
कांबी मिल से निकलने वाले उत्पाद देश के बुनियादी ढांचे के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होंगे. जहां इसके वायर रॉड्स का उपयोग ऑटोमोबाइल सेक्टर और टायर इंडस्ट्री में होगा, वहीं मर्चेंट बार्स का उपयोग गगनचुंबी इमारतों और पुलों के निर्माण में किया जाएगा. थर्मेक्स और आधुनिक क्वेन्चिंग तकनीक के कारण यहां बनने वाला सरिया बाहर से सख्त और अंदर से लचीला होगा, जो भूकंपरोधी निर्माण के लिए अनिवार्य है. पूरी तरह ऑटोमेटेड होने के कारण इसमें मानवीय त्रुटि की गुंजाइश न के बराबर है.

सस्टेनेबिलिटी और आर्थिक प्रभाव: मेक इन इंडिया को बल
यह मिल केवल उत्पादन ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि टाटा स्टील की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है. आधुनिक भट्टियों (Reheating Furnaces) के उपयोग से यहां ऊर्जा की खपत कम होगी और कार्बन फुटप्रिंट को घटाने में मदद मिलेगी. 1,500 करोड़ का यह निवेश न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरकर वैश्विक बाजार में भी भारत की धाक जमाएगा. यह इकाई सही मायनों में मेक इन इंडिया के सपने को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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