Tata Steel Mining Penalty: झारखंड के रामगढ़ जिला खनन विभाग ने दिग्गज स्टील कंपनी टाटा स्टील पर करीब दो दशक पुराने मामले में 1,755.10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. विभाग का आरोप है कि कंपनी ने अपनी वेस्ट बोकारो खदान से वित्तीय वर्ष 2000-01 से 2006-07 के बीच तय सीमा से लगभग 1.62 करोड़ मीट्रिक टन अतिरिक्त कोयले का उत्खनन किया है. 30 मार्च 2026 को जारी यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के कॉमन कॉज फैसले के आधार पर भेजा गया है, जिसमें स्वीकृत सीमा से अधिक खनन को अवैध मानकर उसकी पूरी कीमत वसूली का प्रावधान है.
टाटा स्टील ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
कंपनी ने राज्य सरकार की इस मांग को पूरी तरह अनुचित और कानूनी आधारहीन करार दिया है. चूंकि टाटा स्टील शेयर बाजार में सूचीबद्ध है, इसलिए सेबी (SEBI) के नियमों के तहत कंपनी ने इस घटनाक्रम की जानकारी सार्वजनिक की है. कंपनी प्रबंधन का तर्क है कि उनका खनन कार्य हमेशा नियमों के दायरे में रहा है और विभाग द्वारा लगाया गया यह भारी-भरकम जुर्माना तथ्यों से परे है.
कोयला मंत्रालय में अपील दायर
झारखंड सरकार के इस आदेश के खिलाफ टाटा स्टील ने 24 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित कोयला मंत्रालय की रिवीजनल अथॉरिटी (पुनरीक्षण प्राधिकारी) के समक्ष याचिका दायर कर दी है. इस अपील में कंपनी ने केंद्र सरकार से राज्य के इस नोटिस की दोबारा जांच करने और इसे रद्द करने की मांग की है. इस कानूनी प्रक्रिया में रामगढ़ के खनन अधिकारी और राज्य सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है.
बढ़ सकती है कानूनी जंग
अब इस करोड़ों के विवाद की सुनवाई केंद्र सरकार के स्तर पर होगी. जहां एक ओर राज्य सरकार राजस्व वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दे रही है, वहीं टाटा स्टील ने केंद्र से हस्तक्षेप की उम्मीद जताई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र के स्तर पर समाधान नहीं निकला, तो यह मामला आने वाले दिनों में लंबी कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है, जिससे खनन क्षेत्र की अन्य कंपनियां भी प्रभावित हो सकती हैं.