Ranchi News: रांची विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध कार्यों को मजबूत करने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है. कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने पदभार संभालने के बाद पहली बार विश्वविद्यालय के सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों और शिक्षकों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की. आर्यभट्ट सभागार में आयोजित इस बैठक में विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति, विभागीय चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई.
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की असली पहचान उसके शोध कार्यों से बनती है. इसी को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में अलग से रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा, ताकि गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा मिल सके. इसके साथ ही इंक्यूबेशन सेंटर, इनोवेशन सेंटर और आईसीटी सेल भी शुरू किए जाएंगे, जिससे तकनीकी दक्षता और नवाचार को मजबूती मिलेगी.
उन्होंने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय के सभी विभागों के लिए एक साझा अकादमिक कैलेंडर तैयार किया जाए. इसमें केवल परीक्षाएं ही नहीं, बल्कि खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगोष्ठी, कार्यशाला और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को भी शामिल किया जाए. इस कैलेंडर को एक सप्ताह के भीतर तैयार कर विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा गया है.
बैठक में शिक्षकों की समयपालन और सक्रिय भागीदारी पर भी जोर दिया गया. कुलपति ने स्पष्ट कहा कि विभागाध्यक्ष केवल मुख्यालय के निर्देशों का इंतजार न करें, बल्कि स्वयं प्रस्ताव तैयार कर पहल करें. उन्होंने शिक्षकों से पुस्तक लेखन, शोध पत्र प्रकाशन और पेटेंट जैसे कार्यों में सक्रिय होने की अपील की.
पुराने पाठ्यक्रमों को तत्काल संशोधित करने का भी निर्देश दिया गया. विशेष रूप से क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा संकाय के विषयों का सिलेबस स्थानीय भाषाओं में तैयार कर वेबसाइट पर उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर सुविधा मिल सके.
पीएचडी गाइड से जुड़े नियमों पर भी स्पष्टता दी गई. अब जेपीएससी से नियुक्त वे शिक्षक, जिनकी परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, पीएचडी गाइड बन सकेंगे. कुलपति ने नैक मूल्यांकन और एनआईआरएफ रैंकिंग में विश्वविद्यालय की बेहतर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आईक्यूएसी टीम को भी आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि नियमित पाठ्यक्रमों में इसे लागू किया जा चुका है, अब व्यावसायिक विभागों को भी जल्द प्रस्ताव भेजकर इसे लागू करना होगा. विश्वविद्यालय से जुड़े सभी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में एक समान सिलेबस और रूटीन लागू किया जाएगा, जबकि अल्पसंख्यक कॉलेजों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार 30 प्रतिशत तक बदलाव की छूट दी जाएगी.