Jharkhand News: झारखंड के पलामू जिले से एक दुखद खबर सामने आई है. हैदरनगर थाना क्षेत्र के पंचपोखरी गांव निवासी झारखंड पुलिस के जवान परशुराम कुमार सिंह की पश्चिम बंगाल में चुनावी ड्यूटी के दौरान मौत हो गई. विभाग ने जहां मौत का कारण ब्रेन हेमरेज बताया है, वहीं परिजनों ने समय पर उचित इलाज नहीं मिलने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं.
चुनावी ड्यूटी के बीच बिगड़ी तबीयत, नहीं मिली राहत
46 वर्षीय परशुराम कुमार सिंह जैप-8 लेस्लीगंज में पदस्थापित थे. हाल ही में वे असम में चुनावी ड्यूटी पूरी कर लौटे थे, जिसके तुरंत बाद उन्हें पश्चिम बंगाल भेज दिया गया. परिजनों का कहना है कि असम से लौटने के बाद से ही उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. उनके बड़े भाई जयराम सिंह के अनुसार, खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्हें पहले मुर्शिदाबाद और फिर उत्तर 24 परगना में ड्यूटी पर तैनात किया गया. इस दौरान वे लगातार अपनी स्थिति के बारे में अधिकारियों को अवगत कराते रहे, लेकिन उन्हें अपेक्षित चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल सकी.
अचानक संपर्क टूटा, अस्पताल में हुई मौत की पुष्टि
परिजनों ने बताया कि रविवार दोपहर करीब 2 बजे के बाद परशुराम से संपर्क नहीं हो पाया. इसके बाद उनके साथियों से सूचना मिली कि उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा है.
करीब एक घंटे बाद फोन के जरिए यह खबर मिली कि डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है. इस अचानक हुई मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
गांव और परिवार में शोक की लहर
घटना की जानकारी मिलते ही पंचपोखरी गांव में मातम छा गया. परिवार के सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल है. गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं और मृतक के प्रति शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं. झारखंड पुलिस एसोसिएशन के सदस्य पार्थिव शरीर को लाने के लिए पश्चिम बंगाल रवाना हो चुके हैं. परिजनों को फिलहाल वहां जाने से रोका गया है.
आज पहुंचेगा पार्थिव शरीर, अंतिम संस्कार की तैयारी
बताया गया है कि सोमवार को जवान का पार्थिव शरीर जैप-8 लेस्लीगंज लाया जाएगा. इसके बाद उसे उनके पैतृक गांव पंचपोखरी ले जाया जाएगा. सोमवार दोपहर बाद शव के हैदरनगर पहुंचने की संभावना है, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा.
मौत की वजह पर सवाल, जांच की मांग तेज
फिलहाल विभागीय स्तर पर जवान की मौत का कारण ब्रेन हेमरेज बताया गया है. हालांकि परिजन इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं. उनका आरोप है कि समय पर समुचित इलाज मिलता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी. परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है.
देश की सेवा में तैनात एक जवान की इस तरह मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ओर जहां ड्यूटी के प्रति उनकी निष्ठा सामने आती है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर गंभीर चिंताएं भी उभरती हैं.