Ranchi News : नई रिपोर्ट्स और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत देशभर में लगभग ₹503.2 करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया है। इस देरी का सीधा असर लाखों ग्रामीण मजदूरों पर पड़ रहा है, जिन्हें काम करने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि अलग-अलग राज्यों में भुगतान में कई दिनों से लेकर महीनों तक की देरी देखी जा रही है। नियमों के अनुसार मजदूरों को काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर भुगतान मिलना चाहिए, लेकिन कई मामलों में यह समय सीमा टूट रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
फंड की कमी और प्रशासनिक देरी से बढ़ा संकट, कई राज्यों में कामकाज प्रभावित
विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार इस स्थिति के पीछे फंड रिलीज में देरी, प्रशासनिक जटिलताएं और लंबित देनदारियां प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। कई राज्यों में मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्य भी प्रभावित हुए हैं और रोजगार की उपलब्धता में गिरावट दर्ज की गई है।
कुछ राज्यों में हजारों मजदूरों की मजदूरी लंबे समय से लंबित है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। वहीं, कई मामलों में काम मांगने के बावजूद पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि भुगतान प्रणाली में सुधार के बावजूद देरी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है, जिससे योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।