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  • 2026-05-02

Potka News: सबरनगर आवासीय विद्यालय की बदहाली उजागर, विधायक संजीव सरदार का औचक निरीक्षण, 7 दिन में सुधार का अल्टीमेटम

Potka News: विधायक संजीव सरदार ने अचानक से निरीक्षण करने पर पोटका के ग्वालकट्टा पंचायत स्थित सबरनगर आवासीय विद्यालय में अव्यवस्थाओं की परत खुलने लगी. शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे पहुंचे  विधायक ने पाया कि 248 आदिवासी छात्र बेहद खराब हालात में रह रहे हैं. स्थिति देखकर वे भावुक भी हुए और आक्रोशित भी. मौके पर ही प्रधानाध्यापक शशिकांत पाठक और सुपरिटेंडेंट हेमंत कुमार को कड़ी फटकार लगाते हुए 7 दिनों के भीतर सुधार का निर्देश दिया.
निरीक्षण में खुली हकीकत, बच्चों ने खुद दिखाया सच
निरीक्षण के दौरान नाश्ते का समय था, लेकिन छात्रों को तय मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया गया था. विधायक को देखते ही बच्चे खुद सामने आए और उन्हें पूरे स्कूल का दौरा कराते हुए वास्तविक स्थिति से अवगत कराया.
छात्रों की शिकायतों से साफ हो गया कि कागजों में दिखने वाली व्यवस्थाएं जमीन पर पूरी तरह फेल हैं. मौके पर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी नीरज सिंह समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे.

हॉस्टल और शौचालय की हालत बदतर, बीमारी का खतरा
हॉस्टल और शौचालय की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई. जगह-जगह गंदगी, बदबू और अस्वच्छता का आलम था. कमरों में पंखे और लाइट तक नहीं थे, जबकि बेड पर चादर भी उपलब्ध नहीं थी. भीषण गर्मी में बिना बुनियादी सुविधाओं के रह रहे छात्र त्वचा संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. यह दृश्य देखकर विधायक ने गहरी नाराजगी जताई.

भोजन में लापरवाही, दूध में मिलावट और घटिया सामग्री का इस्तेमाल
छात्रों ने बताया कि उन्हें न तो तय मेन्यू के अनुसार नाश्ता मिलता है और न ही गुणवत्तापूर्ण भोजन. केला, इडली और उपमा जैसी चीजें मेन्यू में होने के बावजूद नहीं दी जातीं. दूध में लगभग 80 प्रतिशत पानी मिलाने और होर्लिक्स की जगह केवल चीनी देने की शिकायत सामने आई. सब्जी बनाने में घटिया तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे दुर्गंध आती है. इतना ही नहीं, खाना बनाने के लिए छात्रों से बाहर से पानी मंगवाया जाता है.

बिजली, पानी और खेल सुविधाओं का भी अभाव
विद्यालय में पिछले छह वर्षों से जेनरेटर खराब पड़ा है, जिसे अब तक ठीक नहीं कराया गया. पंखे और बिजली की उचित व्यवस्था नहीं होने से छात्र गर्मी में परेशान हैं. खेल सामग्री की भी भारी कमी है. छात्रों ने बताया कि उन्हें फुटबॉल तक उपलब्ध नहीं कराई जाती और कई बार उन्हें अपनी किताबें बेचकर खेल सामग्री खरीदनी पड़ती है. सुविधा मांगने पर भोजन में कटौती करने के आरोप भी सामने आए हैं.

विधायक का कहना है कि बिचौलियों के कारण योजनाएं दम तोड़ रहीं निरीक्षण के बाद विधायक संजीव सरदार ने कहा कि यह स्थिति दिखाती है कि सरकार की योजनाएं सही तरीके से छात्रों तक नहीं पहुंच पा रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बीच में बिचौलियों का हस्तक्षेप है, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि आदिवासी छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

7 दिन का अल्टीमेटम, 6 महीने में बदलाव का भरोसा
विधायक ने मौके पर ही डीडीसी को पूरी जानकारी दी और संबंधित कर्मियों को 7 दिनों के भीतर सुधार का सख्त निर्देश दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि समयसीमा में सुधार नहीं होने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी. साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे खुद विद्यालय की निगरानी करेंगे और 6 महीने के भीतर हालात पूरी तरह बदल दिए जाएंगे. इस मामले की जानकारी विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री तक भी पहुंचाई जाएगी, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके.

सबरनगर आवासीय विद्यालय की यह तस्वीर सिर्फ एक संस्थान की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. अब देखना होगा कि प्रशासन और विभाग इस चेतावनी के बाद कितनी तेजी से हालात सुधारते हैं.
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