International News: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए अपने सहयोगी देशों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. ईरान के साथ जारी टकराव के नौवें सप्ताह में अमेरिका ने इजरायल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात को 8.6 अरब डॉलर (करीब 72,000 करोड़ रुपये) से अधिक के सैन्य सौदों को मंजूरी दे दी है. इस फैसले को क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच अहम माना जा रहा है.
किस देश को क्या मिलेगा, कैसे बदलेगा सैन्य संतुलन
US डिपार्टमेंट ऑफ़ स्टेट की ओर से मंजूर इस डील के तहत खाड़ी देशों को उनकी जरूरतों के हिसाब से आधुनिक हथियार और रक्षा प्रणाली दी जाएगी. कुवैत को अपनी सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए 2.5 बिलियन डॉलर का इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम दिया जाएगा. वहीं कतर को इस सौदे का सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जिसके तहत उसे 4.01 बिलियन डॉलर की पैट्रियट एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के साथ APKWS हथियार मिलेंगे. संयुक्त अरब अमीरात को भी 147.6 मिलियन डॉलर के APKWS हथियार दिए जाएंगे. इन सौदों का मकसद क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगियों की रक्षा क्षमता को और मजबूत करना है.
ट्रंप का विरोधियों पर हमला और ईरान पर बड़ा दावा
इस बड़े फैसले के साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Florida के “द विलेजेस” में दिए गए अपने संबोधन में राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने उन आलोचकों को देशद्रोही तक करार दिया, जो ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि स्थिति को लेकर कांग्रेस को पहले ही जानकारी दी जा चुकी है और जो लोग जीत पर सवाल उठा रहे हैं, वे गलत संदेश दे रहे हैं. ट्रंप ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है. उनके अनुसार, ईरान की नौसेना, वायुसेना और रडार सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और उसके कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं. उन्होंने इस ऑपरेशन की तुलना जनवरी में वेनेज़ूला में हुई कार्रवाई से करते हुए इसे इतिहास के बड़े सैन्य अभियानों में से एक बताया.
परमाणु कार्यक्रम को रोकने की रणनीति पर जोर
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ उठाया गया यह कदम केवल सैन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है. उनका कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था. उन्होंने दावा किया कि B-2 Spirit बॉम्बर के इस्तेमाल से ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को बड़ा झटका दिया गया है. ट्रंप के मुताबिक, अगर यह कदम नहीं उठाया जाता, तो इजरायल समेत पूरे मिडिल ईस्ट और यूरोप के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था.
अमेरिका का यह सैन्य सौदा और ट्रंप के बयान साफ संकेत देते हैं कि मिडिल ईस्ट में हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. जहां एक तरफ अमेरिका अपने सहयोगियों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान को लेकर सख्त रुख भी जारी है. आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम का असर क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा समीकरणों पर साफ नजर आ सकता है.