Jharkhand News: हजारीबाग के जिला स्वास्थ्य विभाग में जैम पोर्टल के जरिए सामान मंगाने में भारी भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है. विभाग ने 17 लाख रुपये की सामग्री के लिए ऑर्डर जारी किया था, लेकिन हकीकत में केवल 8 लाख रुपये का ही सामान प्राप्त हुआ. शेष 9 लाख रुपये की राशि की सामग्री का कोई अता-पता नहीं है, जिससे पूरी विभागीय कार्यशैली पर उंगलियां उठ रही हैं.
फील्ड विजिट के दौरान खुली भ्रष्टाचार की पोल
घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार और कुष्ठ निवारण पदाधिकारी फील्ड विजिट पर निकले. जांच के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों (CHC और PHC) में जरूरी हेल्थ कार्ड और फैमिली फोल्डर गायब मिले. पूछताछ में पता चला कि मार्च 2025 में भुगतान होने के बावजूद सामग्री की आपूर्ति कभी हुई ही नहीं, जबकि कागज पर भुगतान पूरा दिखाया गया था.
सामान के बदले कैश लेने का आरोप और जांच कमेटी का गठन
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि गायब सामग्री के बदले कुछ कर्मियों ने एजेंसी से नकद राशि ली है. इस धांधली की गहराई से जांच के लिए सिविल सर्जन ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है, जिसमें डीवीबीडी डॉ कपिल मुनि प्रसाद, आरसीएच पदाधिकारी डॉ सुभाष प्रसाद और लेखा प्रबंधक अनल कुजूर शामिल हैं. यह टीम साल 2023 से अब तक हुई सभी डिजिटल खरीद का भौतिक सत्यापन करेगी.
भंडारपाल पर गिरी गाज और एफआईआर की चेतावनी
जांच की आंच अब भंडारपाल सह लिपिक तक पहुंच गई है, जिन्होंने एक साल तक स्टॉक की कोई जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी थी. सिविल सर्जन ने अब संबंधित एजेंसी को 15 दिनों के भीतर बचा हुआ सारा सामान उपलब्ध कराने का अंतिम मौका दिया है. यदि निर्धारित समय में आपूर्ति पूरी नहीं होती है, तो विभाग द्वारा एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और दोषी कर्मचारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी.