Jharkhand News: अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने जिला कोषागार से करोड़ों रुपये की अवैध वेतन निकासी मामले में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. एसआईटी ने हजारीबाग और बोकारो के एसपी कार्यालयों की लेखा शाखा से मुख्य कंप्यूटर के हार्ड डिस्क को जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेज दिया है. फॉरेंसिक जांच के जरिए उन डेटा को रिकवर किया जाएगा जिसे आरोपियों ने मिटा दिया था, ताकि यह पता चल सके कि कितने नए खाते जोड़े गए और कब-कब धोखाधड़ी की गई.
दो तरह की वेतन पर्ची बनाकर दिया गया वारदात को अंजाम
एसआईटी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी वेतन निकासी के लिए एक ही व्यक्ति के नाम पर दो तरह की वेतन पर्ची तैयार करते थे. डीडीओ (DDO) से बिल पास कराते समय वे मूल कॉपी दिखाते थे, लेकिन पास होने के बाद उसके पीछे फर्जी कॉपी लगा देते थे. इस फर्जीवाड़े के जरिए पैसे निकालने के बाद वे फर्जी कागजात को नष्ट कर देते थे ताकि कोई साक्ष्य न बचे. हजारीबाग में लगभग 31 करोड़ रुपये और बोकारो में करीब 10 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का अब तक पता चला है.
मास्टरमाइंड समेत अब तक दस आरोपी भेजे गए जेल
इस पूरे मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जिनमें हजारीबाग से छह और बोकारो से चार लोग शामिल हैं. हजारीबाग एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में कार्यरत सिपाही शंभू कुमार को इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया गया है. शंभू के साथ उसकी पत्नी काजल कुमारी और अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है. इसी तरह बोकारो में मुख्य लेखापाल सिपाही कौशल कुमार पांडेय और उसके सहयोगियों को पुलिस जेल भेज चुकी है.
फरार आरोपियों के खिलाफ वारंट लेने की तैयारी
एसआईटी अब उन फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है, जिनके खातों में मास्टरमाइंड शंभू कुमार ने बड़ी राशि ट्रांसफर की थी. अनुसंधान के दौरान दो नए आरोपियों के नाम सामने आए हैं जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. जांच टीम जल्द ही कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट हासिल कर उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी करेगी. पुलिस का मानना है कि हार्ड डिस्क की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद इस घोटाले में कई अन्य बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं.