Ranchi News: हटिया कामगार यूनियन (एटक) के उपाध्यक्ष लालदेव सिंह ने हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) में व्याप्त अव्यवस्था को लेकर मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने ई-मेल के जरिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय श्रम मंत्रालय को पत्र भेजकर प्रबंधन पर श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया है. यूनियन ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए एक उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कमेटी बनाने की मांग की है ताकि संस्थान की बिगड़ती स्थिति में सुधार हो सके.
बकाया वेतन और वैधानिक लाभों में भारी कटौती
लालदेव सिंह ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा है कि एचईसी में सार्वजनिक उपक्रमों के लिए तय अनिवार्य नियमों को ताक पर रख दिया गया है. कर्मचारियों को महीनों से समय पर वेतन नहीं मिल रहा है और ओवरटाइम का पैसा भी अटका हुआ है. इसके अलावा, भविष्य निधि (पीएफ) और ईएसआई जैसे बुनियादी वैधानिक अधिकारों में भी गंभीर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे हजारों कर्मियों का आर्थिक भविष्य अंधकार में लटक गया है.
न्यूनतम मजदूरी की अनदेखी और कागजी अपारदर्शिता
मीडिया रिपोर्ट्स और यूनियन के दावों के अनुसार, संस्थान में न्यूनतम मजदूरी कानून का पालन तक नहीं हो रहा है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मजदूरों को उनकी वेतन पर्ची (सैलरी स्लिप) भी नहीं दी जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध और अपारदर्शी बनी हुई है. कामगारों का कहना है कि इस प्रशासनिक विफलता की वजह से उनके लिए परिवार का भरण-पोषण करना और सामाजिक जरूरतों को पूरा करना नामुमकिन होता जा रहा है.
शीर्ष प्रबंधन की जवाबदेही और कार्रवाई की मांग
शिकायत में यह भी रेखांकित किया गया है कि वर्तमान में भेल (BHEL) के शीर्ष अधिकारी एचईसी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर स्थितियां बदतर बनी हुई हैं. एटक ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस शोषणकारी रवैये के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए. फिलहाल, कर्मियों की नजरें अब राष्ट्रपति भवन और पीएमओ की ओर से आने वाले किसी ठोस निर्देश पर टिकी हैं.