Ranchi News : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभागों में शिक्षकों के पद सृजित करने की मांग तेज हो गई है। छात्र संगठनों और शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि विभागों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है।ज्ञापन में कहा गया कि झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी है। वर्तमान में कई विभागों में नियमित शिक्षकों की संख्या बेहद कम है, जिससे छात्रों को शैक्षणिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप पद सृजन की मांग
छात्रों ने नई शिक्षा नीति 2020 का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय और मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। मांग की गई कि प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के रिक्त पदों को परिवर्तित कर सहायक प्राध्यापक के पदों में बदला जाए, ताकि शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चल सके।
शोधार्थियों का कहना है कि नागपुरी, कुरुख, मुंडारी, संताली और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति छात्रों की रुचि लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर भी असर पड़ सकता है।