Jharkhand News : सरकार ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन कराने का फैसला लिया है। इस संबंध में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी किया है। सरकार के संज्ञान में यह बात आई है कि कई क्षेत्रों में भुगतान और पात्रता को लेकर समस्याएं सामने आ रही हैं। इसे देखते हुए योजना का लाभ ले रही महिलाओं की दोबारा जांच करने का निर्णय लिया गया है।
पंचायत और वार्ड स्तर पर शुरू होगा सत्यापन अभियान, पात्र महिलाओं को ही मिलेगा लाभ
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अपात्र महिला योजना का लाभ ले रही है तो उसका नाम सूची से हटा दिया जाएगा। योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और केवल वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है।
लोहरदगा जिला प्रशासन ने भी इस संबंध में आम सूचना जारी करते हुए कहा है कि सत्यापन कार्य पंचायत और वार्ड स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में संबंधित मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक और अन्य कर्मियों को शामिल किया गया है।
आधार, बैंक खाते और पोर्टल की जानकारी का होगा मिलान
भौतिक सत्यापन के दौरान लाभार्थियों के आधार सीडिंग और बैंक खाते से मैपिंग की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा पोर्टल पर दर्ज नाम, पिता या पति का नाम, आधार संख्या और बैंक खाते की जानकारी का मिलान किया जाएगा, ताकि भुगतान से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को दूर किया जा सके।
सरकार का कहना है कि कई मामलों में गलत बैंक विवरण या आधार लिंक नहीं होने की वजह से भुगतान में दिक्कतें आ रही थीं। सत्यापन के जरिए इन समस्याओं को भी ठीक किया जाएगा।
सत्यापन कार्यक्रम के अनुसार 11 मई से 18 मई तक ग्रामीण क्षेत्रों की प्रत्येक पंचायत और शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक वार्ड में भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद 19 मई से 24 मई तक प्राप्त रिपोर्ट का संकलन होगा और अयोग्य लाभार्थियों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
25 मई से 27 मई तक मृत, अयोग्य और अनुपस्थित लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार कर पंचायत भवन या अंचल कार्यालय के सूचना पट पर प्रकाशित की जाएगी। वहीं 29 मई को आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजी जाएगी।
इन महिलाओं को योजना के लिए माना जाएगा अपात्र
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार यदि आवेदिका या उसके पति केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या स्थानीय निकायों में नियमित, स्थायी या संविदा पर कार्यरत हैं अथवा पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, तो वे योजना के लिए पात्र नहीं होंगी।
इसके अलावा जिन परिवारों का कोई सदस्य वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक है अथवा आयकर दाता है, उन्हें भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग की किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ लेने वाली महिलाएं भी इस योजना के लिए अपात्र मानी जाएंगी। वहीं ईपीएफ खाताधारी महिला आवेदकों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।