Jamshedpur News: जमशेदपुर में साइबर ठगी के मामले डराने वाले स्तर पर पहुंच गए हैं. साइबर अपराधियों के निशाने पर अब सबसे ज्यादा बुजुर्ग और रिटायर कर्मचारी हैं. मिडिया रिपोर्ट्स में प्रकाशित, पुलिस और साइबर सेल के आंकड़ों के अनुसार, शहर में होने वाली कुल ठगी के मामलों में से करीब 54 फीसदी शिकार वरिष्ठ नागरिक ही हो रहे हैं. हर दिन औसतन पांच नए मामले सामने आ रहे हैं, जो शहर की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश का फैला जाल
पिछले एक साल में दर्ज 600 मामलों में से 324 में बुजुर्गों को चूना लगाया गया है. साइबर अपराधी बुजुर्गों को ठगने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं, जिनमें डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश के जाल सबसे प्रमुख हैं. ठग खुद को सीबीआई (CBI), पुलिस या बैंक अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं या केवाईसी (KYC) अपडेट के नाम पर उनका बैंक खाता खाली कर देते हैं. विशिष्ट आंकड़ों की बात करें तो बैंक केवाईसी और ओटीपी फ्रॉड के 67 मामले, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पुलिस कॉल के 65 मामले, तथा निवेश एवं शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड के 49 मामले दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा यूपीआई और क्यूआर कोड स्कैम के 39, लॉटरी और इनाम के 39, व्हाट्सएप पर रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने के 38 और ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड के 18 मामले सामने आए हैं. सोशल मीडिया ठगी के 11 और नौकरी के नाम पर फ्रॉड के 5 मामले भी इस सूची में शामिल हैं.
जमशेदपुर पुलिस की सुरक्षा रणनीति और जागरूकता शिविर
बढ़ते मामलों को देखते हुए जमशेदपुर पुलिस अब हर थाना क्षेत्र में जागरूकता शिविर लगाएगी. इन शिविरों में बैंक अधिकारी और साइबर विशेषज्ञ बुजुर्गों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचने का प्रशिक्षण देंगे. साइबर डीएसपी मनोज ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है. पुलिस ने हिदायत दी है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और वीडियो कॉल पर खुद को अधिकारी बताने वालों से सतर्क रहें.
ठगी होने पर तुरंत करें हेल्पलाइन 1930 पर कॉल
साइबर सेल ने अपील की है कि यदि किसी के साथ धोखाधड़ी होती है, तो वे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या नजदीकी थाने को सूचना दें. पुलिस अब रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि को सुरक्षित रखने के लिए विशेष अभियान चला रही है ताकि अपराधियों के बढ़ते हौसलों पर लगाम कसी जा सके.