Ranchi News : झारखंड हाई कोर्ट ने अवैध खनन में जब्त वाहन की नीलामी मामले में राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार को मामले का समाधान लेकर आना चाहिए था, लेकिन वह सिर्फ समय मांग रही है। कोर्ट ने सरकार को एक माह का समय देते हुए मुख्य सचिव को भी मामले पर नजर रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी।मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने पक्ष रखा।
पूर्व डीसी से कोर्ट ने पूछा- अब तक समाधान क्यों नहीं निकला
सुनवाई के दौरान लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त भोर सिंह यादव वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के कारण वह कोर्ट में सशरीर उपस्थित नहीं हो सके। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस समस्या की शुरुआत आपके कार्यकाल में हुई, उसका समाधान अब तक क्यों नहीं निकला।
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहन की जब्ती के बाद इतनी जल्दबाजी में नीलामी क्यों की गई और उसे तीसरे पक्ष को क्यों सौंप दिया गया। अदालत ने कहा कि जब मामले में रिवीजन याचिका लंबित थी, तब वाहन मालिक को पूरा मौका दिए बिना नीलामी करना उचित नहीं था।
वर्तमान डीसी भी कोर्ट में हुए उपस्थित
सुनवाई के दौरान लातेहार के वर्तमान उपायुक्त संदीप कुमार भी कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए। कोर्ट ने सरकार के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत आम लोगों की समस्याओं का जल्द समाधान चाहती है, लेकिन सरकार ऐसे मामलों में देरी करती है।
याचिकाकर्ता अशोक सिंह ने अदालत को बताया कि उनका हाईवा वाहन गया जिले से चोरी हो गया था, जिसकी प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। बाद में वही वाहन बालूमाथ में अवैध खनन परिवहन के दौरान पकड़ा गया। आरोप है कि तत्कालीन डीसी भोर सिंह यादव ने वाहन जब्त कर जल्दबाजी में उसकी नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी और उसे कम कीमत पर तीसरे पक्ष को बेच दिया गया।