Seraikela: सरायकेला-खरसावां जिले में परिवहन व्यवस्था इन दिनों विवादों के घेरे में है। मैक्सी कैब और बड़ी यात्री बसों के बीच परमिट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़क पर खुले टकराव का रूप ले चुका है। बस संचालकों ने आरोप लगाया है कि कुछ रसूखदार और रानजीतिक संरक्षण प्राप्त लोग प्रशासन का मुखौटा पहनकर बीच बाजार में बस चालकों और खलासियों के साथ बदसलूकी, गाली-गलौज और मारपीट कर रहे हैं। इस अराजकता ने जिले की परिवहन सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौन हैं ये निजी जांचकर्ता? संचालकों ने उठाए सवाल
बस संचालक मनोज गुप्ता और अन्य मालिकों का सीधा आरोप है कि दीपक महंती और बबलू शॉव जैसे व्यक्ति जगह-जगह बसों को रोककर उनके दस्तावेज और परमिट की मांग कर रहे हैं। संचालकों का कहना है कि ये लोग न तो परिवहन विभाग के अधिकारी हैं और न ही पुलिस कर्मी, फिर इन्हें सड़कों पर वाहन रोककर फोटो खींचने और दबंगई करने का अधिकार किसने दिया? आरोप है कि यह निजी दबाव बनाकर अवैध वसूली या राजनीतिक रसूख दिखाने का एक नया तरीका बन गया है।
राजनीतिक संरक्षण और दोहरे नियमों का खेल
संचालकों का दावा है कि कुछ पूर्व राजनीतिक प्रत्याशियों के संरक्षण में छोटी गाड़ियों (मैक्सी कैब) के मालिक बड़ी बसों को निशाना बना रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि बड़ी गाड़ियों को जांच के नाम पर परेशान करने वालों की अपनी कई गाड़ियों के पास वैध दस्तावेज तक नहीं हैं। बस मालिकों ने ट्रैफिक पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो कार्रवाई प्रशासन करे, न कि सड़क पर चलने वाले आम लोग कानून अपने हाथ में लें।
क्या कहता है कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट का नियम?
इस विवाद की जड़ में हाल ही में वायरल हुए कुछ दस्तावेज हैं, जिनमें "कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट" और "मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना" के नियमों का हवाला दिया गया है। नियमों के अनुसार, मैक्सी कैब को केवल कॉन्ट्रैक्ट (पूरा वाहन बुक करने) पर चलाने की अनुमति होती है। इन्हें बसों की तरह सड़क से अलग-अलग सवारियां बैठाने का कानूनी अधिकार नहीं है। वायरल पर्चों में चेतावनी दी गई है कि नियमों के उल्लंघन पर वाहन की जब्ती और परमिट रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ सकता है तनाव
फिलहाल सरायकेला की सड़कों पर यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि कौन वैध है और कौन अवैध। परमिट की यह तकनीकी लड़ाई अब वर्चस्व की जंग में तब्दील हो चुकी है। स्थानीय लोगों को डर है कि यदि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने जल्द ही इस मामले में हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो यह आपसी विवाद किसी बड़ी हिंसक घटना को जन्म दे सकता है।