Jharkhand: झारखंड सचिवालय में उप सचिव और संयुक्त सचिव के पदों पर बहाली और सृजन की प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। वर्ष 2018 में शुरू हुआ पदों के आकलन का मामला अब जाकर प्रशासनिक फाइलों से बाहर निकला है, लेकिन कार्मिक विभाग और सचिवालय सेवा संघ के बीच कानूनी और तकनीकी दांव-पेंच ने इस प्रक्रिया को उलझा दिया है। केंद्र की एडवाइजरी और दस्तावेजों की मांग को लेकर दोनों पक्ष अब आमने-सामने हैं।
केंद्र की एडवाइजरी पर छिड़ा विवाद, क्या सचिवालय सेवा Group-A में है?
विवाद की मुख्य जड़ कार्मिक विभाग द्वारा फाइल वापस मंगाना है। विभाग ने केंद्र सरकार की एक एडवाइजरी का हवाला देते हुए फाइल को प्रक्रिया से रोक दिया है। इधर, सचिवालय सेवा संघ ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। संघ का तर्क है कि जिस एडवाइजरी का हवाला दिया जा रहा है, वह Group-A सेवाओं के लिए है और इसे सचिवालय सेवा पर थोपना नियमसंगत नहीं है। संघ का कहना है कि जब विभागीय मंत्री और वित्त विभाग की सहमति मिल चुकी थी, तो अंतिम चरण में फाइल रोकना अनुचित है।
दस्तावेजों की मांग और मानव श्रृंखला से विरोध
फाइल लौटाए जाने के बाद सचिवालय कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। विरोध जताने के लिए कर्मचारियों ने मानव श्रृंखला बनाई, जिसके बाद कार्मिक विभाग ने नरम रुख अपनाते हुए कैडर रिव्यू कमेटी में संघ के पदाधिकारियों को शामिल तो कर लिया, लेकिन अब दस्तावेजों की मांग को लेकर नया गतिरोध पैदा हो गया है। कार्मिक विभाग द्वारा मांगे जा रहे दस्तावेजों को संघ टालमटोल और प्रक्रिया में देरी करने की रणनीति बता रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा जरूरत, कार्मिक विभाग ने कहा नो
2018 के आकलन के अनुसार, सचिवालय के विभिन्न विभागों में अधिकारियों की भारी कमी है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ कार्मिक, उद्योग, पथ निर्माण और खाद्य आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विभागों ने अतिरिक्त पदों की जरूरत नहीं बताई, वहीं उच्च शिक्षा विभाग ने सबसे अधिक 5 उप सचिव और 3 संयुक्त सचिव पदों की मांग की है। गृह, समाज कल्याण, कृषि और ग्रामीण विकास विभाग ने भी काम के बोझ को देखते हुए नए पदों के सृजन पर जोर दिया है।
पदों के सृजन की आवश्यकता और भविष्य
पिछले आठ वर्षों में राज्य के कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों में काफी विस्तार हुआ है, जिससे मौजूदा अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ा है। सचिवालय सेवा संघ का मानना है कि यदि जल्द ही संयुक्त और उप सचिव के पदों का सृजन नहीं हुआ, तो प्रशासनिक व्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ेगा। फिलहाल, सबकी नजरें कैडर रिव्यू कमेटी की अगली बैठक पर टिकी हैं कि क्या यह विवाद सुलझ पाता है या सचिवालय में विरोध का दौर और लंबा खिंचेगा।