National News: देश के असंगठित क्षेत्र के सबसे बड़े कार्यबल में से एक, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का देशव्यापी आंदोलन दोपहर 12 बजते ही शुरू हो गया है. गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) के आह्वान पर आज शनिवार को दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सभी ऐप-आधारित सेवाओं को पूरी तरह बंद रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. यूनियन की मुख्य मांग है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सभी डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के लिए न्यूनतम सेवा पारिश्रमिक 20 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया जाए. इस 5 घंटे की हड़ताल के कारण महानगरों और बड़े शहरों में फूड, ग्रोसरी और कैब सेवाएं प्रभावित होना शुरू हो गई हैं.
4 साल बाद सबसे बड़ी तेल बढ़ोतरी: 1.2 करोड़ कामगारों पर वित्तीय बोझ
यूनियन के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में की गई लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी इस आंदोलन की मुख्य वजह है. करीब चार वर्षों में हुई इस पहली सबसे बड़ी देशव्यापी तेल वृद्धि ने लगभग 1.2 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स पर सीधा और असहनीय वित्तीय बोझ डाल दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष को इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है, जिससे कामगारों का मुनाफा अब लगभग खत्म हो चुका है.
भीषण गर्मी और महंगाई की दोहरी मार: एग्रीगेटर कंपनियों को चेतावनी
GIPSWU की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि पहले से ही महंगी घरेलू एलपीजी और बढ़ती जीवनयापन लागत से जूझ रहे कामगारों के लिए अब वाहनों का परिचालन खर्च उठाना असंभव हो गया है. उन्होंने विशेष रूप से स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो जैसी त्वरित-कॉमर्स कंपनियों और ओला, उबर, रैपिडो के राइडर्स का मुद्दा उठाया. सीमा सिंह ने चेतावनी दी कि यह कार्यबल इस समय देश के कई हिस्सों में चल रही भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच काम कर रहा है. यदि तत्काल न्यूनतम किराया संशोधित नहीं किया गया, तो लाखों कामगार इस क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे.
दिसंबर 2025 के बाद फिर बढ़ा टकराव: इन प्रमुख सेवाओं पर सीधा असर
यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में असंतोष देखा गया है. इससे पहले दिसंबर 2025 में भी डिलीवरी और राइड-हेलिंग कर्मचारियों ने 10-मिनट की असुरक्षित डिलीवरी प्रणाली, गिरते इंसेंटिव और सामाजिक सुरक्षा के अभाव को लेकर एक बड़ा देशव्यापी प्रदर्शन किया था. वर्तमान हड़ताल से जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट जैसी फूड व ग्रोसरी डिलीवरी के साथ-साथ ओला, उबर, रैपिडो और पोर्टर जैसी लॉजिस्टिक्स सेवाएं शाम 5 बजे तक बाधित रहेंगी. यह स्थिति डिजिटल एग्रीगेटर कंपनियों और सरकार दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है.