Seraikela News: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों के घर टूट रहे हैं, फसलें बर्बाद हो रही हैं और ग्रामीण दहशत में जीने को मजबूर हैं। इसी बीच ईचागढ़ की विधायक सविता महतो का बयान विवादों में आ गया है। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान हाथी समस्या पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि “हाथियों के झुंड को बांधकर नहीं रख सकते। हाथी को जो मन करेगा वही खाने जाएगा। जंगलों में अब उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है।
मुआवजा नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
विधायक के बयान के बाद स्थानीय समाजसेवियों और विस्थापित अधिकार मंच ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। समाजसेवी राकेश रंजन महतो ने बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि सिर्फ मुआवजा देना समाधान नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल हाथियों के हमले में घर टूटते हैं, फसलें बर्बाद होती हैं और लोगों की जान जाती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते। लोगों ने सवाल किया कि क्या जान की कीमत केवल मुआवजा भर है।
आदरडीह से लेटेमदा तक तबाही, कई घर बने निशाना
चांडिल बांध विस्थापित क्षेत्र के कुकड़ू, ईचागढ़ और चांडिल प्रखंड में हाथियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। दो दिन पहले कुकड़ू के आदरडीह चौका गांव में हाथी ने ग्राम प्रधान गुरुपद गोप का घर तोड़ दिया, जिसमें उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। वहीं गुरुवार रात लेटेमदा रेलवे स्टेशन के पास गणेश मंदिर के नजदीक जंगली हाथी ने उत्तम महतो का मकान पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। दीवारें तोड़ दी गईं और घर में रखा अनाज भी बर्बाद हो गया। परिवार के लोग समय रहते बाहर निकल गए, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
हर रात पहरा देने को मजबूर ग्रामीण, हाथी कॉरिडोर बहाल करने की मांग
लगातार बढ़ते हमलों से कुकड़ू प्रखंड के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीण रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। विस्थापित अधिकार मंच ने सरकार से हाथी कॉरिडोर बहाल करने, जंगलों में चारा-पानी की व्यवस्था करने और गांवों में स्थायी क्यूआरटी दस्ता तैनात करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल बयानबाजी से लोगों की जान नहीं बचेगी, सरकार को अब जमीन पर ठोस कार्रवाई करनी होगी।