Hazaribagh: हजारीबाग शहर स्थित खजांची तालाब में शुक्रवार शाम हुए हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। तालाब में डूबे 22 वर्षीय युवक कमांडो वर्मा का शव करीब 20 घंटे बाद शनिवार दोपहर गोताखोरों की मदद से बाहर निकाला गया। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में जिला प्रशासन की व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखी गई। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब पांच बजे चार युवक खजांची तालाब घूमने पहुंचे थे। इसी दौरान दो युवक तालाब में नहाने के लिए उतरे। कुछ देर बाद एक युवक बाहर निकल आया, जबकि ओकनी निवासी कमांडो वर्मा गहरे पानी में डूब गए। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग तालाब के आसपास जुट गए।
देर रात तक चलता रहा तलाश अभियान
युवक के डूबने की सूचना मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंच गए और प्रशासन से मदद की मांग की। स्थानीय स्तर पर देर रात तक युवक की तलाश की जाती रही, लेकिन प्रशिक्षित गोताखोर और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। इस दौरान परिजनों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। उनका कहना था कि समय पर उचित बचाव व्यवस्था होती तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।
विधायक की पहल पर बुलाए गए गोताखोर
घटना की जानकारी मिलने के बाद सदर विधायक प्रदीप प्रसाद भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। देर शाम अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू अभियान में दिक्कतें आ रही थीं। इसके बाद विधायक की पहल पर शनिवार सुबह चौपारण से गोताखोरों की टीम बुलाई गई। गोताखोरों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद तालाब से युवक का शव बाहर निकाला। शव बाहर आते ही मौके पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे इलाके में शोक का माहौल छा गया।
एनडीआरएफ टीम की मांग फिर हुई तेज
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
मौके पर मौजूद विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि उन्होंने पहले भी विधानसभा में हजारीबाग में एनडीआरएफ टीम की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि यदि जिले में प्रशिक्षित आपदा राहत टीम उपलब्ध रहती तो बचाव कार्य में इतनी परेशानी नहीं होती। इस घटना के बाद जिले में आपदा प्रबंधन व्यवस्था, तालाबों की सुरक्षा और आपातकालीन राहत संसाधनों की उपलब्धता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।