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  • 2026-05-17

Jharkhand News: झारखंड में जनजातीय नेताओं की अनदेखी पर भड़की भाजपा, आदित्य साहू का सरकार पर तंज, कहा:- पद स्थायी नहीं होते

Jharkhand News: पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के साथ चाईबासा परिसदन में जिला प्रशासन द्वारा किए गए उपेक्षापूर्ण व्यवहार पर भाजपा ने कड़ा एतराज जताया है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट शेयर करते हुए राज्य सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया है. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि किसी का भी पद स्थाई नहीं होता है, लेकिन प्रशासनिक और लोकतांत्रिक परंपरा हर हाल में कायम रहनी चाहिए.

वरिष्ठ नेताओं के प्रति सामान्य शिष्टाचार का पालन जरूरी
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अर्जुन मुंडा के साथ जिस प्रकार का बर्ताव किया गया, वह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि प्रशासनिक मर्यादाओं और पूरे जनजातीय समाज के सम्मान का विषय है. उन्होंने याद दिलाया कि पद समय के साथ आते-जाते रहते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति का योगदान, अनुभव और सामाजिक सम्मान सदैव महत्वपूर्ण रहता है. जो व्यक्ति राज्य के मुख्यमंत्री और देश के केंद्रीय मंत्री जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर चुके हों, उनके प्रति सामान्य प्रशासनिक शिष्टाचार का पालन किया जाना हर हाल में अपेक्षित था.

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ भी हुआ था असम्मानजनक व्यवहार
आदित्य साहू ने राज्य सरकार को घेरते हुए चाईबासा की एक पुरानी घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ भी चाईबासा में उपायुक्त यानी डीसी द्वारा असम्मानजनक व्यवहार किए जाने का मामला सामने आ चुका है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह एक नई परंपरा बनती जा रही है कि जनजातीय समाज के वरिष्ठ नेताओं की गरिमा की जानबूझकर अनदेखी की जाए.

प्रशासनिक उदासीनता को बताया अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण
भाजपा अध्यक्ष के अनुसार वर्तमान सरकार के शासनकाल में लोकतांत्रिक मूल्यों, प्रशासनिक संवेदनशीलता और सामाजिक सौजन्यता की परंपराएं लगातार कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं. पश्चिम सिंहभूम जैसे ऐतिहासिक और जनजातीय बहुल जिले में प्रशासन की इस प्रकार की उदासीनता अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी सदैव जनजातीय अस्मिता की पक्षधर रही है और सम्मानित नेतृत्व के प्रति इस प्रकार का व्यवहार सामाजिक सम्मान की भावना को आहत करने वाला है.
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