Ranchi News : राजकीय श्रावणी मेला की तैयारियों के बीच स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों में ड्यूटी प्रतिनियुक्ति और लंबित टीए-डीए भुगतान को लेकर नाराजगी बढ़ने लगी है। झारखंड राज्य एमपीडब्ल्यू कर्मचारी संघ ने इस मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख को पत्र भेजा है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से सभी जिलों से 40-40 स्वास्थ्य कर्मियों के नाम श्रावणी मेला ड्यूटी के लिए मांगे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल सूची को कॉपी-पेस्ट कर उन्हीं कर्मियों की दोबारा प्रतिनियुक्ति कर दी जाती है, जो उचित नहीं है।
संघ ने मांग की है कि इस बार वैसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए, जिन्हें अब तक देवघर या दुमका श्रावणी मेला ड्यूटी में सेवा का मौका नहीं मिला है।
वर्ष 2016 से लंबित है कई कर्मियों का टीए-डीए भुगतान
संघ द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कई जिलों में वर्ष 2016 से अब तक श्रावणी मेला ड्यूटी करने वाले कर्मियों का यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता लंबित है। इससे कर्मचारियों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।
संघ के अनुसार करीब 20 दिनों की मेला ड्यूटी में एक कर्मी का प्रतिदिन लगभग 1000 रुपये खर्च होता है। इस हिसाब से एक कर्मचारी पर करीब 20 हजार रुपये तक का खर्च आता है, जिसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है।
भुगतान नहीं हुआ तो ड्यूटी बहिष्कार की चेतावनी
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी पुराने कर्मियों की ही प्रतिनियुक्ति की गई और लंबित टीए-डीए का भुगतान नहीं हुआ, तो इसका खुलकर विरोध किया जाएगा। साथ ही श्रावणी मेला ड्यूटी का बहिष्कार भी किया जा सकता है।
संघ ने कहा कि ऐसी स्थिति में यदि विधि-व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित जिलों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सिविल सर्जन, निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की होगी।