Ranchi News : CCL को जमीन मुआवजा मामले में झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से जुड़ी सीसीएल की चार प्रथम अपीलों को खारिज कर दिया है। यह फैसला अनुभव रावत चौधरी की अदालत ने सुनाया।मामला हजारीबाग जिले के मांडू थाना क्षेत्र स्थित पिंडरा गांव की जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है। सीसीएल ने वर्ष 1981 में कोयला खनन परियोजना के लिए खाता संख्या 4 और 6 की जमीन का अधिग्रहण किया था। जमीन मालिकों ने मुआवजा कम मिलने का आरोप लगाते हुए अधिक राशि की मांग की थी।
ट्रिब्यूनल ने तय किया था 600 रुपये प्रति डिसमिल मुआवजा
इस मामले में ए.जे.सी.-I सह ट्रिब्यूनल अंडर कोल बियरिंग एरिया एक्ट, रांची ने 30 मई 2013 को फैसला सुनाते हुए जमीन का बाजार मूल्य 600 रुपये प्रति डिसमिल तय किया था। ट्रिब्यूनल ने इसके साथ 30 प्रतिशत सोलाटियम, 12 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि और बढ़ी हुई राशि पर 9 प्रतिशत तथा बाद के वर्षों में 15 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया था।
सीसीएल ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर कहा था कि ट्रिब्यूनल ने मुआवजे की राशि जरूरत से ज्यादा बढ़ा दी है और विकास लागत में कटौती नहीं की गई है।
हाईकोर्ट ने कहा- विकास लागत कटौती का कोई साक्ष्य नहीं
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जमीन का अधिग्रहण कोयला खनन परियोजना के लिए किया गया था और रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि जमीन के विकास पर कोई विशेष खर्च किया जाना था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के विकास लागत में कटौती नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने यह भी माना कि ट्रिब्यूनल ने पहले के समान मामलों और लइयो गांव से जुड़े फैसलों को आधार बनाकर 600 रुपये प्रति डिसमिल की दर तय की थी, जो उचित है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखते हुए सीसीएल की सभी अपीलों को खारिज कर दिया।