Assam Politics: असम विधानसभा के नए सत्र की शुरुआत गुरुवार को शपथ ग्रहण समारोह के साथ हुई. 16वीं विधानसभा के पहले दिन मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने विधायक पद की शपथ लेकर अपने नए कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत की. उन्हें प्रोटेम स्पीकर चंद्र मोहन पटवारी ने शपथ दिलाई. मुख्यमंत्री ने असमिया भाषा में शपथ ग्रहण किया.
सदन की शुरुआत से पहले विधायकों को दी गई प्रक्रिया की जानकारी
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रोटेम स्पीकर ने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ ग्रहण की प्रक्रिया समझाई. उन्होंने बताया कि सदस्य अपनी पसंद की किसी भी मान्यता प्राप्त भाषा में शपथ ले सकते हैं. साथ ही शपथ की लिखित प्रति विधानसभा कार्यालय में जमा कराने की भी जानकारी दी गई.
असम विधानसभा में दिखी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता
मुख्यमंत्री के शपथ लेने के बाद अलग अलग राजनीतिक दलों के नवनिर्वाचित विधायकों ने भी सदन में शपथ ग्रहण किया. इस दौरान असमिया, बांग्ला, बोडो और संस्कृत समेत कई भाषाओं का इस्तेमाल किया गया. बहुभाषी शपथ ग्रहण ने असम की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता की तस्वीर पेश की. विधानसभा परिसर में पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह का माहौल देखने को मिला. नवनिर्वाचित विधायक अपने समर्थकों और पार्टी नेताओं के साथ विधानसभा पहुंचे और संवैधानिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया.
एनडीए की बड़ी जीत के बाद शुरू हुआ विधानसभा का नया कार्यकाल
यह शपथ ग्रहण समारोह हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की प्रचंड जीत के बाद आयोजित किया गया. भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है. गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी, असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने मिलकर 126 सदस्यीय विधानसभा में कुल 102 सीटों पर जीत दर्ज की. इस जीत के साथ एनडीए ने राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है.
भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी, विपक्ष को मिली सीमित सीटें
चुनाव परिणामों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा 82 सीटें मिलीं. वहीं असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने 10-10 सीटों पर जीत हासिल की. विपक्ष की बात करें तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 19 सीटें मिलीं. इसके अलावा राइजर दल ने दो सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं अखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा को दो और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को एक सीट पर सफलता मिली. नए विधानसभा सत्र के साथ अब राज्य में नई राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा तय होने की उम्मीद बढ़ गई है.