Jharkhand Big News: रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार जेल) में एक महिला कैदी के गर्भवती होने के बेहद गंभीर मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है. अदालत ने इस मामले से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों और राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे गए पत्र का स्वतः संज्ञान लिया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक के विशेष निर्देश पर गठित वेकेशन बेंच के न्यायाधीश जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने इस पूरे मामले को अब एक जनहित याचिका (PIL) में तब्दील कर दिया है. अदालत ने इस मामले की चौतरफा जांच के लिए गृह विभाग के प्रधान सचिव, डीजीपी, कारा महानिरीक्षक, रांची डीसी, एसएसपी और होटवार जेल अधीक्षक को प्रतिवादी बनाया है.
जेल प्रबंधन पर अपराधियों से साठगांठ और शोषण के गंभीर आरोप
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को भेजे अपने पत्र में राज्य की जेलों के भीतर अधिकारियों और अपराधियों के बीच गहरे गठजोड़ का सनसनीखेज आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि होटवार जेल में महिला कैदी के साथ यौन शोषण हुआ, जिससे वह गर्भवती हो गई, लेकिन जेल प्रशासन ने कार्रवाई करने के बजाय मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया. मरांडी ने अपने पत्र में जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर और जेलर लवकुश कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने यह भी उजागर किया कि चतरा जेल में तैनाती के दौरान जेलर लवकुश कुमार पर एक महिला होमगार्ड के शारीरिक और मानसिक शोषण का आरोप लगा था और विरोध करने पर उसके पति को जान से मारने की धमकी दी गई थी. हाई कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अब जेलों में महिला कैदियों की सुरक्षा और जेल प्रशासन की पूरी कार्यप्रणाली की व्यापक जांच होना तय माना जा रहा है.