Latehar News: लातेहार जिले के सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और गरिमा बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है. उपायुक्त (DC) संदीप कुमार ने एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए ड्यूटी अवधि के दौरान सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के जींस, टीशर्ट या अन्य कैजुअल कपड़े पहनकर दफ्तर आने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी कार्यालय कोई फैशन स्टेज, मॉल या मनोरंजन का स्थान नहीं हैं, बल्कि यह जनता की सेवा का केंद्र है. इसलिए, सभी कर्मियों को निर्धारित कार्य अवधि में केवल औपचारिक (फॉर्मल) परिधानों में ही उपस्थित होना होगा, ताकि कार्यालयी माहौल की गरिमा अक्षुण्ण रहे.
समयपालन और जनशिकायतों पर संज्ञान लेकर की गई सख्ती
यह प्रशासनिक कड़ाई जिले के विभिन्न विभागों में अनुशासनहीनता और कार्य के प्रति लापरवाही को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों के बाद की गई है. आम जनता की ओर से यह शिकायतें आ रही थीं कि कई कर्मी कार्यालय समय पर उपस्थित नहीं रहते, देर से आते हैं या समय से पूर्व ही चले जाते हैं, जिससे लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं. उपायुक्त ने साफ कर दिया है कि अब समयपालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. निर्धारित समय से देर से आना या बिना अनुमति के कार्यस्थल से गायब रहना अब गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जाएगा और संबंधित कर्मियों के विरुद्ध सीधी कार्रवाई की जाएगी.
कामकाज में जवाबदेही और फाइलों के त्वरित निष्पादन पर जोर
नए दिशा-निर्देशों के तहत केवल उपस्थिति और ड्रेस कोड ही नहीं, बल्कि कार्यों की गुणवत्ता और गति की भी नियमित निगरानी की जाएगी. डीसी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया है कि जनता के आवेदनों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और टालमटोल की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगाई जाए. यदि किसी पटल पर कार्य बिना ठोस कारण के रुका हुआ पाया जाता है, तो संबंधित पटल प्रभारी की जवाबदेही तय करते हुए दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे. प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गतिशीलता लाना है.
कार्यालयों की छवि सुधारने और स्वच्छता बनाए रखने का निर्देश
इस प्रशासनिक सुधार अभियान के अंतर्गत कार्यालयी वातावरण को स्वच्छ और सुव्यवस्थित रखने पर भी विशेष बल दिया गया है. सभी कार्यालय प्रधानों को अपने-अपने परिसरों में फाइलों के उचित रखरखाव, स्वच्छता और अनुशासित माहौल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. दफ्तरों में पाई जाने वाली अव्यवस्था या गंदगी को सीधे तौर पर संबंधित अधिकारियों की शिथिलता माना जाएगा. इस आदेश के बाद जिला स्तर पर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और इसे व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा आम नागरिकों को समय पर राहत पहुंचाने की दिशा में एक गंभीर प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.