Jamtara: सूबे के स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र जामताड़ा से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहां के सदर अस्पताल में सरकारी दावों और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल उस वक्त खुल गई, जब एक अजन्मी जान और उसकी मां की जिंदगी डॉक्टरों की घोर लापरवाही की भेंट चढ़ने की कगार पर पहुंच गई। अस्पताल में कागजी औपचारिकताएं पूरी हुईं, ₹10 की पर्ची कटी और बेड भी नसीब हुआ, लेकिन जिस मसीहा को भगवान का रूप मानकर पीड़ित परिवार वहां पहुंचा था, वे डॉक्टर साहब पूरी रात अस्पताल से नदारद रहे।
सिसकती रही मानवता, मिन्नतें करते रहे परिजन, पर नहीं पसीजा दिल
यह घटना शनिवार, 23 मई की रात की है। मिहिजाम थाना क्षेत्र के केलाही गांव की रहने वाली 5 महीने की गर्भवती आदिवासी महिला, प्रीति हांसदा को अचानक अत्यधिक ब्लीडिंग (रक्तस्राव) होने लगी। घबराए परिजन तड़पती हुई बेटी को लेकर रात करीब 10 बजे बड़ी उम्मीदों के साथ जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचे। लेकिन अस्पताल का मंजर किसी डरावने सपने जैसा था। रात के सन्नाटे में अस्पताल के भीतर एक भी महिला डॉक्टर मौजूद नहीं थी। बेबस परिजन रातभर वहां मौजूद नर्सों और कर्मचारियों के आगे हाथ जोड़ते रहे, गिड़गिड़ाते रहे कि "साहब, किसी डॉक्टर को बुला दीजिए, हमारी बच्ची मर जाएगी।" मगर अफसोस, उस चीख-पुकार को सुनने वाला वहां कोई नहीं था।
लाचारी की पराकाष्ठा, सामने तड़पती रही मां, नियमों की बेड़ियों में जकड़ी रहीं नर्सें
रात के अंधेरे में एक-दो एएनएम और जीएनएम (नर्सें) जरूर मरीज के पास आईं, लेकिन सरकारी नियमों की बेड़ियों में जकड़ी व्यवस्था ने उनके हाथ बांध रखे थे। डॉक्टरों के लिखित परामर्श (Prescription) के बिना वे तड़पती हुई महिला को एक अदद दर्द निवारक दवा या इंजेक्शन तक देने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं। नतीजतन, पूरी रात उस वार्ड के बिस्तर पर एक बेबस मां दर्द से कराहती रही, उसका शरीर खून से लथपथ होता रहा और उसके भीतर पल रही मासूम जान की सांसें धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गईं। अस्पताल का वह बेड इलाज का जरिया बनने के बजाय, उस महिला के लिए यातना का बिछौना बन गया।
स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र में शून्य व्यवस्था, निजी क्लीनिक में जिंदगी की जंग लड़ रही प्रीति
जब रविवार की सुबह 7 बजे तक भी कोई डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचा और प्रीति की हालत पूरी तरह नाजुक हो गई, तो निराश और हताश परिजनों ने उसकी बची-खुची सांसों को बचाने के लिए आनन-फानन में उसे मिहिजाम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां वह इस वक्त जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। इस घटना ने पीड़ित परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके के लोगों को गहरे आक्रोश और गम में डुबो दिया है। रोते हुए परिजनों ने इस लाचार सिस्टम पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "यह सूबे के स्वास्थ्य मंत्री का अपना गृह क्षेत्र है, और यहां का यह हाल है! कागजों पर करोड़ों खर्च होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य है। हमारी बच्ची के साथ जो हुआ, वह किसी अपराध से कम नहीं है।"