Ranchi News : झारखंड के कई जिलों में अब तक बालू घाटों की नीलामी पूरी नहीं हो सकी है। इसका असर अब सीधे बाजार में दिखने लगा है। अवैध खनन से निकाली जा रही बालू की कीमत लगातार बढ़ रही है और आम लोगों को ऊंचे दाम पर बालू खरीदनी पड़ रही है। राज्य सरकार को भी इससे भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है।
राज्य में कुल 444 बालू घाटों में से अब तक 299 घाटों की ही नीलामी पूरी हो सकी है, जबकि 145 घाटों की नीलामी अब भी लंबित है। पिछले कई वर्षों से नीलामी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण बालू माफिया सक्रिय हैं और अवैध कारोबार से मोटी कमाई कर रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि सभी घाटों की नीलामी होने पर करीब 4000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
कई जिलों में बिना नीलामी जारी है बालू उठाव
झारखंड के गिरिडीह, लोहरदगा, कोडरमा, सिमडेगा, पलामू, गढ़वा, पश्चिमी सिंहभूम और देवघर जैसे जिलों में कई बालू घाट अब तक बिना ठेकेदार के हैं। इसके बावजूद नदियों से लगातार बालू का उठाव जारी है। विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बाद भी कई जिलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।
बालू की बढ़ती कीमतों का असर निर्माण कार्यों पर भी पड़ रहा है। मकान निर्माण, सरकारी योजनाओं और अन्य विकास कार्यों की लागत बढ़ गई है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक बालू की किल्लत लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
लोहरदगा, पलामू और गढ़वा में सबसे अधिक लंबित घाट
जिलों में लंबित बालू घाटों की स्थिति भी चिंताजनक है। लोहरदगा में 21 घाटों की नीलामी लंबित है, जिनका अधिगृहित मूल्य करीब 188 करोड़ रुपये से अधिक है। कोडरमा में 33 घाटों का मूल्य 42 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
पलामू में 18 घाटों का अधिगृहित मूल्य 347 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। इसी तरह सिमडेगा में 14 घाटों का मूल्य 35 करोड़ रुपये, गिरिडीह में 31 घाटों का मूल्य 125 करोड़ रुपये, गढ़वा में 31 घाटों का मूल्य 718 करोड़ रुपये और देवघर में 14 घाटों का मूल्य 63 करोड़ रुपये से अधिक है। पश्चिमी सिंहभूम में भी एक घाट समूह की नीलामी लंबित है।
अवैध कारोबारियों की बढ़ रही कमाई
कई जिलों में बड़े समूहों और प्रमुख घाटों की नीलामी प्रक्रिया अधूरी है। पलामू के गोरहो, कोल्हुआ सोनबरसा, डंगवार और गंगी-लिडकी-ककटुआ जैसे घाटों की नीलामी अब तक नहीं हो सकी है। वहीं लोहरदगा और कोडरमा में भी कई बड़े घाट समूह अब तक लंबित हैं।
नीलामी प्रक्रिया में देरी के कारण जहां सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध कारोबारियों की चांदी कट रही है। बालू की बढ़ती कीमतों से आम लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।