Jharkhand News: झारखंड में गर्मी और बढ़ती उमस के साथ सर्पदंश की घटनाओं में इजाफा देखा जा रहा है. खासकर पलामू समेत कई जिलों में मामले बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है. विभाग के अनुसार पिछले चार वर्षों में राज्य में सर्पदंश के मामलों में करीब 10.4 गुना वृद्धि दर्ज की गई है. वर्ष 2026 में अप्रैल तक ही 561 मामले सामने आ चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर सर्पदंश पीड़ितों के इलाज की व्यवस्था मजबूत करने को कहा है. निर्देश में जिला अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेजों में एंटी स्नेक वेनम सीरम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है. जिन अस्पतालों में दवा उपलब्ध नहीं है, वहां नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों से तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है.
स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं की उपलब्धता पर निगरानी के लिए ई-औषधि डीवीडीएमएस पोर्टल पर एंटी वेनम स्टॉक अपडेट करना अनिवार्य किया है, ताकि राज्य स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा सके. सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सर्पदंश को पहले ही अधिसूचित रोग घोषित किया जा चुका है और सभी मामलों की रिपोर्टिंग आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर करना जरूरी है.
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के तहत वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता में 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य तय किया है. इसी दिशा में राज्य स्तर पर भी तैयारी तेज की गई है. फिलहाल जिले में 1396 वायल एंटी वेनम उपलब्ध हैं.
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बारिश और उमस के मौसम में खेत, झाड़ियों और सुनसान जगहों पर जाते समय विशेष सावधानी बरतें. यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो झाड़-फूंक या घरेलू इलाज के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें. विभाग के अनुसार पलामू जिले में वर्ष 2024 में 184, वर्ष 2025 में 94 और वर्ष 2026 में अब तक 12 सर्पदंश के मामले सामने आ चुके हैं.