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  • 2026-05-27

Jharkhand News : हाथी-मानव संघर्ष रोकने के लिए एआई तकनीक का सहारा, दलमा-चाकुलिया और चांडिल में लगेंगे स्मार्ट कैमरे

Jharkhand News : झारखंड में बढ़ते हाथी-मानव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग अब आधुनिक एआई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है। पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले के हाथी प्रभावित इलाकों में 26 अत्याधुनिक एआई कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की मदद से हाथियों की गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी, ताकि समय रहते ग्रामीणों और वन विभाग को अलर्ट किया जा सके।


वन विभाग के अनुसार कैमरे पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया वन क्षेत्र, सरायकेला-खरसावां के चांडिल इलाके और दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी में लगाए जा रहे हैं। कैमरा लगाने का काम शुरू हो चुका है।


हाथी दिखते ही बजेगा सायरन


वन अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही कोई हाथी कैमरे की रेंज में आएगा, सिस्टम स्वतः सक्रिय होकर सायरन बजाएगा। इससे आसपास के ग्रामीणों और वन विभाग की टीम को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।

कैमरों में लगे सेंसर और एआई आधारित पहचान प्रणाली हाथियों की मौजूदगी का पता लगाकर तुरंत सूचना जारी करेगी। विभाग का दावा है कि यह तकनीक रात में भी प्रभावी तरीके से काम करेगी।

डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि फिलहाल 26 कैमरे लगाए जा रहे हैं। दलमा के अलावा चाकुलिया और चांडिल के कई संवेदनशील क्षेत्रों को इस योजना में शामिल किया गया है।


संवेदनशील गांवों में लगाए जा रहे कैमरे


वन विभाग के अनुसार चाकुलिया वन क्षेत्र के राजाबासा, जमुआ, माचाडीहा, कलसीमूंग, मोरबेडा और पूर्णापानी गांवों में कैमरे लगाए जा रहे हैं। वहीं चांडिल क्षेत्र के कुकड़ू, नीमडीह, कुसपुतुल और अंडा गांवों में भी निगरानी कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी में हाथियों के आवागमन वाले रास्तों पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। कैमरों के लिए करीब 40 फीट ऊंचे टावर बनाए जा रहे हैं, ताकि दूर तक निगरानी संभव हो सके।


हाथियों के आतंक से परेशान हैं ग्रामीण


पूर्वी सिंहभूम का चाकुलिया और सरायकेला-खरसावां का चांडिल क्षेत्र लंबे समय से हाथियों के उत्पात से प्रभावित रहा है। हाथियों के झुंड अक्सर गांवों में घुसकर घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार जान-माल की हानि की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

वन विभाग ने पहले भी हाथियों को रोकने के लिए कई उपाय किए, लेकिन समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। अब विभाग को उम्मीद है कि एआई कैमरों की मदद से हाथियों की गतिविधियों की पहले से जानकारी मिल सकेगी और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में काफी कमी आएगी।

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