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  • 2026-05-27

Bengal Politics: बंगाल में चुनावी हार के बाद TMC में बगावत तेज, 101 पार्षदों के इस्तीफे से ममता बनर्जी के सामने बड़ा राजनीतिक संकट

Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अब गंभीर राजनीतिक संकट से गुजरती नजर आ रही है. पार्टी को अब केवल विपक्षी दबाव ही नहीं बल्कि संगठन के अंदर बढ़ती नाराजगी और बगावत का भी सामना करना पड़ रहा है. राज्य की अलग अलग नगरपालिकाओं से अब तक TMC के 101 पार्षद अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं. लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है और जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है.
विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ी अंदरूनी कलह और दलबदल
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. चुनावी हार के बाद कई स्थानीय नेताओं और पार्षदों में नाराजगी बढ़ी है. पार्टी के अंदर गुटबाजी, आपसी विवाद और दलबदल की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह है कि बड़ी संख्या में पार्षद पार्टी से दूरी बना रहे हैं.

भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें
तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें केवल इस्तीफों तक सीमित नहीं हैं. पार्टी के कई नेताओं और पार्षदों पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं. जानकारी के मुताबिक इन मामलों में अब तक 17 पार्षदों और स्थानीय नेताओं की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. इन घटनाओं ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है और संगठन पर दबाव बढ़ा दिया है.

किन नगरपालिकाओं से कितने पार्षदों ने दिया इस्तीफा
चुनाव के बाद जिन नगरपालिकाओं में सबसे ज्यादा इस्तीफे देखने को मिले हैं उनमें भटपारा सबसे ऊपर है. यहां से 30 पार्षदों ने पद छोड़ा है. इसके अलावा गारुलिया से 18, हालिसहार से 16, उत्तर बैरकपुर से 15, कोंटाई से 14 और डायमंड हार्बर से 8 पार्षदों ने इस्तीफा दिया है. इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा है.

डायमंड हार्बर में इस्तीफों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
डायमंड हार्बर नगरपालिका में सोमवार को TMC के 8 पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी. यह इलाका लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. खास बात यह है कि यहां से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी सांसद हैं. ऐसे में इस इलाके में पार्टी की कमजोरी को बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है.

ममता बनर्जी के सामने संगठन बचाने की चुनौती
साल 2011 में 35 वर्षों के वाम शासन को समाप्त कर सत्ता में आई ममता बनर्जी को 2026 विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा. राज्य में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने के बाद TMC की राजनीतिक स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है. 15 वर्षों तक सत्ता में रहने वाली पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को दोबारा मजबूत करना और कार्यकर्ताओं का भरोसा वापस जीतना है.

पार्टी छोड़ने वालों को लेकर ममता का सख्त संदेश
कुछ दिन पहले पार्टी नेताओं के साथ हुई बैठक में ममता banerjee ने साफ शब्दों में कहा था कि जिन्हें पार्टी छोड़नी है, वे छोड़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें किसी के जाने की चिंता नहीं है और वे अकेले दम पर पार्टी को फिर से खड़ा कर सकती हैं. ममता के इस बयान को पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी के बीच एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेजी से बदलते हालात के बीच अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि तृणमूल कांग्रेस आने वाले समय में इस संकट से कैसे बाहर निकलती है और संगठन को फिर से मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाती है.
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