Ranchi News: राजधानी रांची के हरमू रोड (मुक्तिधाम के समीप) स्थित कंपोजिट लाइसेंस संख्या 080 से जुड़ी शराब दो महीने पहले रामगढ़ में अवैध रूप से पकड़ी गई थी. इस मामले में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई थी, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी लाइसेंसधारी गुलशन कुमार समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
रामगढ़ में जब्त की गई थी 170 पेटी शराब
पूरा मामला अवैध शराब की तस्करी से जुड़ा है. जानकारी के अनुसार, रांची की दुकान (लाइसेंस संख्या 080) के लिए आवंटित की गई 170 पेटी शराब को नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से रामगढ़ इलाके में बेचा जा रहा था. इसकी भनक लगते ही रामगढ़ उत्पाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शराब से लदे वाहन को अपने कब्जे में ले लिया था और मौके से चालक को गिरफ्तार किया था. हालांकि, इस पूरे खेल के मुख्य किरदार यानी दुकान संचालक और लाइसेंसधारी के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया.
मामला दबाने की आशंका से बाजार गर्म
इतनी बड़ी गड़बड़ी और हेरफेर सामने आने के बाद भी लाइसेंसधारी का बचे रहना अब शराब कारोबार से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है. कारोबारी हलकों में दबी जुबान से यह आशंका जताई जा रही है कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है. नियमों की बात करें तो ऐसे मामलों में तुरंत लाइसेंस निलंबन (सस्पेंशन) से लेकर ब्लैकलिस्ट करने तक का कड़ा प्रावधान है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं दिखा, जिससे विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.
शराब व्यवसायी संघ ने उठाए गंभीर सवाल
इधर, झारखंड शराब व्यवसायी संघ ने भी प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है. संघ के महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि दो महीने का लंबा वक्त गुजर जाने के बावजूद किसी भी प्रकार की कार्रवाई न होना कई बड़े सवाल खड़े करता है. उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कुछ बड़े व्यवसायियों और अधिकारियों की आपसी मिलीभगत की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता.
निष्पक्ष जांच पर टिकी नजरें
जब अवैध परिवहन और तस्करी का मामला पूरी तरह साफ हो चुका है, तब उत्पाद विभाग की यह चुप्पी समझ से परे है. अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इस रसूखदार लाइसेंसधारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की फाइल कब आगे बढ़ेगी और इस पूरे सिंडिकेट के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब करने के लिए निष्पक्ष जांच कैसे और कब सुनिश्चित की जाएगी.