Ranchi News: झारखंड में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंताएं बढ़ने लगी हैं. इस मुद्दे पर रविवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित संगोष्ठी में आदिवासी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की मांग की.
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए झारखंड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य एवं पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया के कारण आदिवासी समाज के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या कम करने की कोशिश की गई तो इसका जोरदार विरोध किया जाएगा.
राजनीतिक अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है मुद्दा
बंधु तिर्की ने कहा कि संविधान में आदिवासियों के संरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. ऐसे में परिसीमन केवल चुनावी क्षेत्रों के पुनर्गठन का मामला नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज के राजनीतिक अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है.
2 अगस्त को रांची में होगी आदिवासी एकता महाजुटान रैली
संगोष्ठी में मौजूद विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि परिसीमन के मुद्दे पर जनजागरण और एकजुटता के लिए 2 अगस्त को रांची में आदिवासी एकता महाजुटान रैली आयोजित की जाएगी. रैली की तैयारी और समन्वय की जिम्मेदारी ग्लैडसन डुंगडुंग, शशि पन्ना और अनिल पन्ना को सौंपी गई है.
संविधान के प्रावधानों का पालन करने की उठी मांग
बैठक में वक्ताओं ने मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया के दौरान संविधान के अनुच्छेद 330, 332 और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाए. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या किसी भी परिस्थिति में कम नहीं होनी चाहिए. साथ ही यदि भविष्य में कुल सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है तो आरक्षित सीटों की संख्या में भी उसी अनुपात में वृद्धि की जानी चाहिए.
कई प्रमुख नेता और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद
इस संगोष्ठी में सुखदेव भगत, कालीचरण मुंडा, दयामनी बारला, वासवी किड़ो समेत विभिन्न जिलों से आए सामाजिक कार्यकर्ता, कानूनी विशेषज्ञ और राजनीतिक प्रतिनिधि शामिल हुए. सभी ने आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया.