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  • 2026-06-01

Ranchi News : झारखंड में नियम तोड़ने वाले बिल्डरों पर सख्ती, बिना पर्यावरण मंजूरी निर्माण पर होगी कार्रवाई

Ranchi News : झारखंड में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कर निर्माण कार्य करने वाले बिल्डरों और डेवलपर्स के खिलाफ झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (JSPCB) ने सख्त रुख अपनाया है। पर्षद ने स्पष्ट किया है कि बिना आवश्यक अनुमति और पर्यावरणीय स्वीकृतियों के भवन निर्माण, टाउनशिप और एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट संचालित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी द्वारा जारी नोटिस में सभी संबंधित परियोजनाओं को स्थापना सहमति (Consent to Establish-CTE) और संचालन सहमति (Consent to Operate-CTO) के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का निर्देश दिया गया है। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले बिल्डरों और डेवलपर्स पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा कानूनी कार्रवाई करने और परियोजनाओं को सील करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।


बड़े निर्माण और टाउनशिप प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरण स्वीकृति अनिवार्य


नोटिस के अनुसार 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक तथा 1.50 लाख वर्ग मीटर से कम बिल्ट-अप एरिया वाले भवन निर्माण प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरण स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। वहीं 50 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले अथवा 1.50 लाख वर्ग मीटर से अधिक बिल्ट-अप एरिया वाले टाउनशिप और बड़े एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स भी पर्यावरणीय मंजूरी के दायरे में आएंगे।


ऑरेंज और ग्रीन कैटेगरी में बांटे गए प्रोजेक्ट्स


प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक बिल्ट-अप एरिया वाले निर्माण कार्यों को ऑरेंज कैटेगरी में रखा है। इन परियोजनाओं के लिए CTE और CTO प्राप्त करना अनिवार्य होगा। वहीं 5 हजार से 20 हजार वर्ग मीटर तक के छोटे और मध्यम आकार के प्रोजेक्ट्स को ग्रीन कैटेगरी में शामिल किया गया है, जिन पर भी निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा।


पर्यावरण संरक्षण और नियमानुसार विकास पर जोर


पर्षद का कहना है कि राज्य में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और विकास परियोजनाओं को निर्धारित नियमों के तहत संचालित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। बोर्ड ने सभी डेवलपर्स, बिल्डरों और निर्माण एजेंसियों से समय पर आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने तथा पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का मानना है कि इससे अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर रोक लगेगी और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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