Jharkhand News: झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन और लहू बोलेगा रक्तदान संगठन ने स्वास्थ्य विभाग की हालिया समीक्षा बैठक पर गहरी नाराजगी जताई है. संगठनों का कहना है कि इस महत्वपूर्ण बैठक में थैलेसीमिया समेत अन्य गंभीर रक्त विकारों (ब्लड डिसऑर्डर) से जुड़ी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे मरीज और उनके परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
लंबे समय से लंबित हैं मरीजों की मांगें
संगठनों के मुताबिक, राज्य में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया और हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों की कई मांगें लंबे समय से अटकी हुई हैं. इन समस्याओं के समाधान के लिए मरीजों और उनके परिजनों ने पोस्टकार्ड अभियान चलाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य विभाग का ध्यान खींचने की कोशिश भी की थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
स्वास्थ्य मंत्री के पुराने वादों की दिलाई याद
संगठनों ने सरकार को याद दिलाया कि 9 दिसंबर 2025 को विधानसभा सत्र के दौरान खुद स्वास्थ्य मंत्री ने कई बड़े आश्वासन दिए थे. इनमें मरीजों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए सरकारी सहायता, मुफ्त खून और दवाएं उपलब्ध कराने, एक नई रक्तदान नीति तैयार करने, स्क्रीनिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने और रक्तदान को बढ़ावा देने जैसे जरूरी वादे शामिल थे, जो आज भी सिर्फ कागजों पर हैं.
जल्द से जल्द संवाद शुरू करने की मांग
पीड़ितों के हक में आवाज उठा रहे संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इन घोषणाओं को बिना किसी देरी के जमीन पर लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को तुरंत रक्त विकार के मरीजों और उनके परिजनों के साथ बातचीत शुरू करनी चाहिए, ताकि उनकी जायज समस्याओं को हल किया जा सके और मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सके.